आगामी शरद ऋतु में सम्भावित वायु प्रदूषण एवं स्मॉग की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए नगर निगम लखनऊ द्वारा नॉन अटैन्मेंट सिटी लखनऊ की वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में प्रभावी निवारक उपाय प्रारम्भ कर दिये गये है जिससे नगर में स्थापित/संचालित CAAQMS से प्राप्त प्रदूषण संबंधी आंकड़ों में सुधार हो सके।
लखनऊ शहर के वायु प्रदूषण में रोड डस्ट मुख्य कारक है। वाहनों के आवागमन तथा हवा चलने पर सड़क पर जमा धूल के कण वातावरण में छा जाते हैं। इसके अतिरिक्त नगरीय क्षेत्रों में गार्बेज बर्निंग से भी वायु प्रदूषण बढ़ने की सम्भावना रहती है। निर्माण कार्यो में प्रयुक्त सामग्री के अवशेष से भी वायु प्रदूषण की समस्या रहती है। ऐसी परिस्थितियों में नगर के समस्त क्षेत्रों में हॉट स्पॉट को चिन्हित कर निर्माण कार्य, बिल्डिंग मैटेरियल, रोड डस्ट, इण्डस्ट्रीयल क्षेत्र में प्रदूषण, टै्रफिक जाम एवं कूड़ा जलाने इत्यादि से उत्पन्न वायु प्रदूषण को विभिन्न विभागों के सहयोग से नियंत्रित किये जाने की दिशा में नगर निगम लखनऊ प्रयासरत है।
उपरोक्त प्रयासों के क्रम में आज दिनांक 10.11.2021 को नगर आयुक्त श्री अजय कुमार द्विवेदी द्वारा लालबाग एवं तालकटोरा का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित CAAQMS इंडिकेटर्स का अवलोकन भी किया गया। इस क्रम में जन स्वास्थ्य के हित में जन साधारण को स्वच्छ वातावरण प्रदान करने हेतु नगर निगम लखनऊ द्वारा निर्माण संस्थाएं जैसे कि लोक निर्माण विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, राजकीय निर्माण निगम, राजस्व सेतु निगम, उ0प्र0 जल निगम इत्यादि से अपने स्वामित्व वाले क्षेत्रों में निर्माण सामाग्रियों को ढकने, निर्माण स्थलों व मार्गो पर पानी छिडकाव, निर्माणाधीन कार्यो को ग्रीन मैटिंग का पर्दा लगाने, खुले मे कूड़ा न फेकने तथा कूड़ा जलाये जाने की स्थिति में सम्बन्धित के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया गया है। उपरोक्त कार्यो की समीक्षा हेतु नगर आयुक्त नगर निगम लखनऊ की अध्यक्षता में दिनांक 11.11.2021 को 12ः00 बजे लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, जिला प्रशासन, प्रभागीय वन अधिकारी (DFO), अपर पुलिस उपायुक्त (यातायात), क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO), जिला अद्योग एवं उद्यमी प्रोत्साहन केन्द्र, एन.एच.ए.आई. लखनऊ, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, कृषि विभाग, जिला उद्यान विभाग, उ.प्र. राज्य सेतु निगम, उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम, गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई, उ.प्र्र. जल निगम, उ.प. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण इत्यादि विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गयी है।
वायु प्रदूषण की प्रभावी रोकथाम हेतु नगर निगम लखनऊ द्वारा समस्त मार्गों की मरम्मत एवं गड्ढा मुक्ति का कार्य कराते हुए रोड डस्ट नियंत्रण का कार्य किया किया जा रहा है। मुख्य सड़कों की मैकेनिकल मशीनों से रोड स्वीपिंग करायी जा रही है। सड़कों की नाइट वाशिंग एवं पानी का सघन छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही गार्बेज बर्निंग से होने वाले वायु प्रदूषण के नियंत्रण हेतु नगर निगम के समस्त क्षेत्र में शत-प्रतिशत कूड़े का संग्रहण कराते हुए कूड़ा उठाने वाले समस्त वाहनों को अनिवार्य रूप से कवर कराते हुए ट्रांसपोर्टेशन कराया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण स्थल पर आग लगने की घटनाओं को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा जोन/वार्डवार टीमों का गठन करते हुए कूड़ा जलाने वाले व्यक्ति/संस्थान के विरूद्ध आर्थिक दण्ड भी अधिरोपित किया जा रहा है।
नागरिकों को पार्कों में सूखी घास एवं पत्तियों को जलाने से रोकने हेतु जागरुक किया जा रहा है। उक्त के अतिरिक्त कंस्ट्रक्शन एण्ड डिमॉलिशन वेस्ट नियंत्रण हेतु क्षेत्रों में खुले में पड़े सी. एण्ड डी. वेस्ट एवं सड़क के किनारे निर्माणाधीन भवनों के स्थल पर/निर्माण सामग्री के फुटकर विक्रेताओं द्वारा खुले में भण्डारित निर्माण सामग्री यथा बालू, मौरंग, सीमेण्ट को ढककर रखे जाने व ग्रीन नेट से कवर किये जाने एवं वाटर स्प्रिंकलिंग की व्यवस्था किये जाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण उत्पन्न करने की दोषी कार्यदांयी संस्थाओं के विरूद्ध अर्थदण्ड एवं कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि उ.प्र. नगर निगम अधिनियम 1959 में खुले व सार्वजनिक स्थानों, सडकों पर कूड़ा फेंकने, सड़क पर मलबा डालने (50,000 रूपये तक) एवं कूड़ा जलाने पर (5,000 रूपये तक) अर्थदण्ड एवं चालान का प्राविधान किया गया है। इसके संबंध में स्थानीय नागरिकों को जागरूक भी किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा यह कार्यवाही निरन्तर जारी रहेगी।
सिद्धान्त सिंह