विधायक-पद के लिए प्रत्याशियों की भी ‘प्रवेश-परीक्षा’ करायी जानी चाहिए

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

उत्तरप्रदेश मे जितने भी विधायक-पद के प्रत्याशी हैं, उनसे हिन्दी और अँगरेज़ी मे विधायक का संक्षेपसूचक शब्द और उनका पूर्ण रूप लिखवाकर तथा अँगरेज़ी मे विधायक को क्या कहते हैं, इसे लिखवा कर और उसका अर्थ पूछकर देख लें। मेरा दावा है कि कम-से-कम ९५ प्रतिशत प्रत्याशी इस परीक्षा मे ‘विफल’ सिद्ध होंगे। यदि विश्वास नहीं हो तो मै ललकारते हुए कहता हूँ, इस परीक्षा को व्यावहारिक धरातल पर कराकर देखिए। इतना ही नहीं, उनसे विधानमण्डल :– विधानसभा और विधानपरिषद् से भी प्रश्न किये जाने चाहिए। ‘विधानसभा’ का चुनाव किसलिए कराया जाता है?’ यह प्रश्न अवश्य किया जाना चाहिए। ‘संविधान के किस नियम के अन्तर्गत विधानसभा का चुनाव कराया जाता है?’, ‘विधायक के पाँच मूल कर्त्तव्य कौन-कौन-से हैं?’ ‘विधानमण्डल’ को ‘विधानमण्डल’ क्यों कहा जाता है?’ आदिक प्रश्न भी किये जाने चाहिए।

विधायक-प्रत्याशी बनने के लिए ‘लिखित’ और ‘मौखिक’ परीक्षाओं की व्यवस्था करायी जाये, जो आरक्षणरहित हो। निर्धारित अंक की प्राप्ति पर ही सम्बन्धित परीक्षार्थियों को विधायक-पद के प्रत्याशी के रूप मे चुनाव लड़ने की अर्हता मिलनी चाहिए। इसके लिए संविधान मे वांछित संशोधन करना पड़ेगा, जो कि अपरिहार्य दिख रहा है।

धिक्कार है, ऐसे प्रत्याशियों का हम चुनाव करने जा रहे हैं। ऐसे मे, हमे गम्भीरतापूर्वक विचार करना होगा– हम ऐसे अयोग्य और कुपात्रों के पक्ष मे मतदान करें अथवा घर बैठकर अपने मूल कर्मो के साथ जुड़े रहें?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ फ़रवरी, २०२२ ईसवी।)