पीएम आवास के लाभार्थियों की सूची पूरी न होने के कारण जांच रही अधूरी

दीपक कुमार श्रीवास्तव-

  • डीएम के निर्देश पर हो रही है पीएम आवास की जांच, शिकायतकर्ता को जानमाल का खतरा

कछौना (हरदोई) : नगर पंचायत कछौना-पतसेनी में अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा मानकों को ताक पर रखते हुए हुए बड़ी तादाद में अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) लाभ देने की शिकायत उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से की गई थी। जिस पर जिलाधिकारी पुलकित खरे के निर्देश पर जांच की जा रही है।

शनिवार को लेखपाल राहुल सिंह द्वारा जांच के बाद गुरुवार को पुनः लेखपाल राहुल सिंह के साथ लेखपाल सलमान ने कस्बे के मोहल्ला पूर्वी बाजार में निर्मित व निर्माणाधीन आवासों की जांच पड़ताल करते हुए लाभार्थियों से पूछताछ की। जांच के दौरान काफी अनियमितताएं सामने आयी, कई लाभार्थी ऐसे मिले जिनका पहले से ही पक्का मकान बना हुआ है वहीं कई बाहरी लोगों को नगर में आवास का लाभ दिया गया है। पूछताछ के दौरान पीएम आवास योजना की गठित जांच टीम के राजस्व लेखपाल राहुल सिंह ने बताया कि शनिवार को की गई जांच के दौरान उनके पास मौजूद 46 लाभार्थियों की सूची में से कुछ की जांच की थी, गुरुवार को नगर पंचायत से प्राप्त कुल 64 लाभार्थियों की सूची से कुल 52 लाभार्थियों की जांच की गई है। शेष बचे लाभार्थियों की जांच दीपावली के उपरांत की जाएगी। जिसके बाद जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। वही शिकायतकर्ता योगेंद्र भइया का कहना है कि नगर पंचायत व डूडा कर्मियों द्वारा वार्ड नंबर 12 की जांच के लिए जो सूची दी गई है वह अधूरी है। जिसमें कई अपात्रों के नाम शामिल नहीं है, जिन्हें आवास का लाभ दिया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग को लेकर कई लोग उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं उन्हें अराजक तत्वों द्वारा जान-माल की हानि पहुंचाई जा सकती है जिसके लिए वह पुलिस प्रशासन को अवगत कराएंगे।

निष्पक्ष होगी जांच, तो कईयों पर गिरेगी गाज

नगर कछौना में आवास की जांच आरंभ होते ही जहां एक और आपात क्लब भर्ती रिकवरी के डर से दहशत में है वही दूसरी ओर नगर में पीएम आवास की हो रही जांच को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार इसमें कोई दोराय नहीं है कि बड़े पैमाने पर अपात्रों को आवास का लाभ दिया गया है, यदि जांच निष्पक्ष होती है तो अपात्रों को पात्रता की सूची में शामिल करने वाले कई अधिकारियों कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है ।