— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
हाथरस की १९ वर्षीया गुड़िया के साथ निर्ममतापूर्वक शारीरिक दुष्कर्म और उसको दी गयीं अमानवीय दैहिक-मानसिक यातना-प्रताड़नाएँ तत्पश्चात् आज (२९ सितम्बर) उसकी मृत्यु चीख़-चीख़ कर कह रही हैं– उत्तरप्रदेश में ‘बेटियाँ’ सुरक्षित नहीं हैं।
कहाँ हैं, हेमा मालिनी, स्मृति ईरानी, मालिनी अवस्थी, जया प्रदा, अनिला सिंह, अदिति सिंह तथा राज्य और केन्द्र के महिला आयोग की अध्यक्ष; कहाँ हैं, तथाकथित महिला आन्दोलन की झण्डाबरदारी करनेवाली परकटियाँ? विपक्ष के राजनीतिक दल सड़क पर निकलने से डर क्यों रहे हैं? क्या यही है, विपक्षी चरित्र?
देश का राष्ट्रपति मौन है और ‘मन की बात’ करनेवाला व्यक्ति गूँगा बना हुआ है। अपराधियों से भरी हुई देश की संसद् में अबला की चीत्कार अनसुनी कर दी जा रही है। उत्तरप्रदेश का मूक मुख्यमन्त्री हमारे लिए अर्थहीन हो चुका है। इस राज्य की पुलिस-व्यवस्था ‘दौ कौड़ी’ से भी बदतर दशा को प्राप्त कर चुकी है।
सच तो यह है कि इस समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ चयनात्मक आधार पर शासन कर रहे हैं। घृणित स्वार्थ के लिए किस व्यक्ति को प्रताड़ित कराना है और किसका महिमामण्डन कराना है, इस आधार पर उत्तरप्रदेश का शासन चलाया जा रहा है। स्वजातीय अपराधियों का बाल तक बाँका न हो और परजातीय अपराधियों को नष्ट कर दिया जाये; स्वजातीय लोग को ऊँच पदों पर विराजित कराया जाये और परजातीय लोग की उपेक्षा की जाये, यह उत्तरप्रदेश की नीति चली आ रही है।
हम इसकी भर्त्सना करते हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ सितम्बर, २०२० ईसवी।)