कछौना, हरदोई। विकासखण्ड कछौना के गौसगंज स्थित जनपद के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज पीबीआर इण्टर कॉलेज तेरवा गौसगंज हरदोई में शनिवार को सीएसआईआर (एनबीआईआर) लखनऊ द्वारा हार्टिकल्चर गार्डन व फ्लोरीकल्चर उद्यान (बाग-बगीचे) का उद्घाटन मुख्य अतिथि/प्रबंधक इंजीनियर अचिन कुमार द्वारा किया गया।
इस बगीचे में पुष्पक कृषि एवं औषधि एवं सुगंधीय पौधे लगाए गए हैं। इस दौरान मुख्य अतिथि प्रबंधक अचिन कुमार ने कहा प्राचीन काल से ही भारतीय चिकित्सा पद्धति में औषधीय पौधों का काफी महत्व है। औषधीय पौधे कफ एवं वात का शमन करने, पीलिया, आँव, हैजा, फेफड़ा, अण्डकोष, तंत्रिका विकार, दीपन, पाचन, उन्माद, रक्त शोधक, ज्वर नाशक, स्मृति एवं बुद्घि का विकास करने, मधुमेह, मलेरिया एवं बलवर्धक, त्वचा रोगों एवं ज्वर आदि में प्राचीन काल से ही लाभकारी हैं। वहीं सुगंधित पौधों को उनकी सुगंध और स्वाद के लिए उपयोग किए जाने वाले एक विशेष प्रकार के पौधे के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। उनमें से कई का उपयोग औषधीय प्रयोजनों के लिए भी किया जाता है। जड़, लकड़ी, छाल, पत्ते, फूल, फल, बीज, आदि पौधों में सुगंधित यौगिक मौजूद होते हैं।
प्राचार्य इंदिरा देवी ने पुष्प कृषि पर प्रकाश डालते हुए कहा भारत में पुष्प की खेती लंबे अरसे से होती रही है, लेकिन आर्थिक रूप से लाभदायक एक व्यवसाय के रूप में पुष्पों का उत्पादन पिछले कुछ सालों से ही प्रारंभ हुआ है। इसके साथ ही पुष्प पौधों में शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने की क्षमता के अलावा वास्तुदोष मिटाने की क्षमता भी है, इसीलिए कुछ लोग अपने मकान के बगीचे में इसी तरह के पौधे लगाते भी हैं। इसके साथ ही पेड़-पौधों का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। ये हमें न सिर्फ ऑक्सीजन देते हैं। बल्कि तमाम प्रकार के फल-फूल, जड़ी बूटियां और लकड़ियां आदि भी देते हैं। घर के आसपास पौधरोपण करने से गर्मी, भू क्षरण, धूल आदि की समस्या से बच सकते हैं।
कृषि विज्ञानी डॉ० शंकर वर्मा ने पौधों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तत्वों की जानकारी दी। उन्होंने प्रत्येक छात्र छात्राओं को पांच-पांच पौधे लगाने और उनके संरक्षण करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर शोधच्छात्र शोभित कुमार, गार्डन प्रभारी ममतेश पटेल, कैसे छात्रों सहित सैकड़ों संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता