मत कहो अपने को विपक्षी नेता; लोकतन्त्र थूकेगा

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

ममता बनर्जी, शरद पवार, हेमन्त सोरेन, उद्धव ठाकरे, मायावती, राजा भइया, वाइ० एस० आर० काँग्रेस, शिवपाल यादव, ओमप्रकाश राजभर आदिक विपक्षी नेता विश्वासघाती निकले। ममता बनर्जी को तो चुल्लूभर पानी मे डूब मरना चाहिए, जिसने राष्ट्रपति-पद के लिए विपक्षी प्रत्याशी के रूप मे यशवन्त सिन्हा को सामने लाया था और ऐन मौक़े पर वह सत्ताधारियों के पाले मे जाकर द्रौपदी मुर्मू की बाँहों मे खेलने लगी है।

ममता बनर्जी प्रथम श्रेणी की विश्वासघातिनी नेत्री निकली। इस महिला को प्रमुख विपक्षी दलों को अपने खेमे से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। इस महिला को मै कभी ‘लौह-महिला’ की संज्ञा देता था, वह तो ‘बालुकामयी महिला’ निकली। उसका जितना अपमान भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं ने किया था, किसी अन्य ने नहीं, उसे वह भूल गयी? उसके ‘राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन’ अर्थात् ‘भारतीय जनता पार्टी’ की प्रत्याशिनी के समर्थन मे आ जाने से उसका गर्हित चरित्र सामने आ चुका है। काँग्रेस और उन विपक्षी दलों के नेताओं को चाहिए, जो यशवन्त सिन्हा के पक्ष मे मतदान करेंगे, उन सभी नेता-नेत्रियों से घोषित रूप मे अपने सम्बन्ध विच्छेद कर लें।

मायावती का राजनैतिक चरित्र किसी से छिपा नहीं है। अब तो वह बिन पेंदी का लोटा हो चुकी है। उस अस्तित्वविहीन महिला ने अम्बेडकर को ख़ूब ओढ़ा-बिछाया और निम्नजातीयवालों की भावनाओं के साथ जमकर खेला किया।

ये सब सुन, देख और समझकर यह सिद्ध हो चुका है– राजनीति वेश्या से भी बदतर है।

आप का मफ़लरधारी अरविन्द केजरीवाल को काँग्रेस का हर स्तर पर विरोध करना ही है, इसलिए वह भी ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ से गले मिलने की तैयारी कर चुका है।

शरद पवार अब ज़रूरत से ज़्यादा तन-मन से बूढ़ा हो चुका है; चेहरा तो विकृत है ही, अन्तर्मन भी निर्मम हो चुका है। उसका बात-व्यवहार भी ऐसा नहीं है, जिससे कि उसे सम्मानजनक सम्बोधन किया जाये। कथित विपक्षी नेताओं की ऐसी ही गर्हित भूमिका के कारण वर्तमान मे विपक्ष “ज़ीरो बटे सन्नाटा” दिख रहा है और इन्हीं सब के चरित्र-परिवर्त्तन से आज लोकतन्त्र को ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ के नुमाइन्दों ने ‘बन्दी’ बनाकर परोक्ष रूप से ‘अधिनायकतन्त्र’ को उसके सामानान्तर ला खड़ा किया है।

विपक्ष के नाम पर एकमात्र ‘भारतीय काँग्रेस पार्टी’ है, जो गिरती-पड़ती-उठती पूर्व शक्ति के साथ कथित सरकार के नुमाइन्दों की ग़लत नीतियों का विरोध करती आ रही है; वहीं दूसरी ओर, अन्य विपक्षी दलों की नेता-नेत्रियाँ विपक्षी चरित्र से हीन और क्षत-विक्षत दिख रही हैं।
धिक्कार है, इन सभी को!

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १५ जुलाई, २०२२ ईसवी।)