हिन्दी-पत्रकारिता का भविष्य समुज्ज्वल है : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

“मैं नहीं स्वीकार करता कि पत्रकारिता के क्षेत्र में विकार-ही-विकार है, वहाँ परिष्कार भी है। अब पत्रकारिता को नये रूप-रंग में ढालकर लोकोपयोगी बनाना होगा, ताकि जनगणमन अपने पूर्वग्रह से ऊपर उठकर पत्रकारिता की पहचान कर सके। स्वाभाविक प्रश्न है, जनता समाचारपत्र-कार्यालयों में जाकर अपना सुझाव क्यों नहीं देती? तभी हम पत्रकारिता को लोकतन्त्र का चतुर्थ स्तम्भ कह सकेंगे। वास्तव में, हम कतिपय विकृतियों को छोड़ दें तो हिन्दी-पत्रकारिता का भविष्य समुज्ज्वल है।”

हिन्दी-पत्रकारिता-दिवस पर कीडगंज, इलाहाबाद में साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘ज्योत्स्ना’ की ओर से ३० मई, २०१८ ई० को आयोजित ‘पत्रकारिता के वर्तमान’ विषय पर अध्यक्षीय सम्भाषण करते हुए, भाषाविद् और मीडियाअध्ययन-विशेषज्ञ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने उक्त विचार व्यक्त किये थे।

चण्डीगढ़ से पधारीं पत्रकारिता और जनसंचार की सहायक प्राध्यापक डॉ० सोमलता ने कहा,” वास्तव में, आज पत्रकारिता की शिक्षा-दीक्षा सन्दिग्ध दिख रही है। ऐसी व्यवस्था बना दी गयी है कि हम मात्र औपचारिकताओं का निर्वहन कर रह जाते हैं। उसमें सुधार की आवश्यकता है।”

सीधी से आये डॉ० रमानाथ कश्यप ने विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार व्यक्त किये,”बुराई कहाँ नहीं है, हमें अच्छाइयों पर ध्यान देते हुए, पत्रकारिता की कमियों को भी उजागर करना चाहिए।”

सहारनपुर से आये डॉ० मिलिन्द गोस्वामी ने बताया,”अब समाचारपत्रों में पाठ्यसामग्री का अभाव दिखने लगा है; क्योंकि लगभग सारे राष्ट्रीय पत्र बाज़ार से प्रभावित होकर निकलते हैं।”

शोधविद्यार्थी कु० मीनाक्षी देवी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में समुचित शोध-दिग्दर्शन को अपर्याप्त बताते हुए कहा,”हम उपयुक्त शोध-निर्देशकों के अभाव में शोध नहीं कर पा रहे हैं; क्योंकि हमारी जिज्ञासाओं का शमन नहीं हो पाता। इस कारण समस्याएँ वहीं-की-वहीं धरी रह जाती हैं।”

इनके अतिरिक्त डॉ० सोमा चटर्जी, डॉ० भावना मुखर्जी, प्रियांशु आदिक ने अपने विचार व्यक्त किये थे। समारोह का संयोजन डॉ० अंजना सिंह ने किया था। डॉ० नमिता अग्रवाल ने संचालन किया था। डॉ० कृष्ण कुमार तिवारी ने आभार-ज्ञापन किया था।