मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

नेता जी मुरदाबाद!

— पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
नेता जी के बग़ल में, सुघर सलोनी सोय।
पुण्य कमाते हर घड़ी, पाप कहाँ से होय।।
दो–
‘नेता’ धाकड़ शब्द है, जपो-जपो हर रोज़।
पाप करो हर दिन सदा, करो अनोखा खोज।।
तीन–
है रूप-रुपया-रुतबा, नेता की पहचान।
आग लगायें देश में, खूब बढ़ायें शान।।
चार–
शान दिखे है मूँछ की, है ऐसी पहचान।
पाप कमाई खा रहे, पूछो तो अनजान।।
पाँच–
सुविधा सारी पा रहे, और-और की चाह।
अजब जीव नेता दिखे, होती इनकी वाह।।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ९ मई, २०२० ईसवी)