मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

‘चुनाव आयोग’ देश की जनता के लिए ख़तरा बना हुआ

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

चुनाव आयोग-अधिकारी ग़ुलाम बन चुके हैं; पाँच राज्यों के लिए होनेवाले विधानसभाचुनावों की तिथि घोषित करने का साहस नहीं कर पा रहे हैं तथा आक्रामक और निर्लज्ज दिख रहीं चुनावी जनसभाओं को पूरी तरह से रोक नहीं पा रहे हैं, जबकि कोरोना का तीसरा चरण पूरी और बुरी तरह से देश मे आ चुका है।

सरकारी दल सत्तातन्त्र का भरपूर दुरुपयोग करता आ रहा है। ऐसे मे, देश का भविष्य शोचनीय चौराहे पर टाँग दिया गया है। चारण-स्वर मुखर हो चुके हैं। नरेन्द्र मोदी ‘दिव्य पुरुष’ बन चुके हैं। उनसे पहले देश मे असभ्यता और अपसंस्कृति का वर्चस्व था; उनके प्रकट होते ही भारत दिव्यमय हो चुका है; देश के समस्त अन्धे, गूँगे, लँगड़े, बहरे लोग ‘दिव्यांग’ हो चुके हैं; सर्वत्र ‘रामराज’ की स्थापना की जा चुकी है।

इस सत्य को चुनाव आयोग के सभी अधिकारी भलीभाँति जानते हैं। उन्हें यह भी मालूम है कि कथित ‘दिव्य पुरुष’ किसी को भी ”अर्श से फ़र्श पर” ला पटक सकता है; जैसा कि वह ‘मदान्ध’ बनकर करता आ रहा है।

चुनाव आयोग के अधिकारी यदि अपने उत्तरदायित्व का निर्वहण नहीं कर पाये तो देश की जनता उन सभी के माथे पर ‘ग़ुलाम आयोग’ टाँकने से पीछे नहीं हटेगी; क्योंकि भारत नक़्ली ग़ुलामो को पलभर के लिए बरदाश्त करने की स्थिति मे अब नहीं है। अब ‘काले अँगरेज़ों’ को लात मारकर बाहर का रास्ता दिखाने का समय आ चुका है, तभी देश की जनता सुकून की नीद सो सकेगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ जनवरी, २०२२ ईसवी।)