आकांक्षा मिश्रा :
सात जनवरी के महीने तुम्हारा इस खूबसूरत संसार मे जन्म लेना हम सभी के लिए बहुत ही खास पल थे । घनी कुहासा से ढ़की ठिठुरते जाड़े में सात तारीख दिन बुधवार तुम नन्हीं सी रुई जैसी नर्म जागृति बेला में इस खूबसूरत संसार मे तुम्हारा आगमन हुआ । बेहद खुशी हुई इस शांत , बेरंग और नीरस घर मे तुम आई । बहुत सालों से कोई बेवजह भी न हँसते न मुस्कुराते मैने किसी को नही देखा । सबके चेहरे पर विवशता और जीवन के प्रति एक उदासी ही दिखाई पड़ती ।
तुम सात रंगों की भांति सात तारीख को हम सबके जीवन मे दस्तक दी । पहली बार तुम मेरी गोद मे आई वैसे मेरे पास कोई भी छोटे बच्चे नही आते ,यदि मैं किसी बच्चे को गोद लेती भी वह बच्चा रोने लगता । मुझे अच्छा नही लगता । जागृति वेला में आने की वजह से उस दिन से जागृति और मेरे द्वारा क्षितिजा नाम से तुम्हारी पहचान हुई । बाबा को क्षितिजा नाम अच्छा लगा था । क्षितिजा मुझे यह नाम बहुत अच्छा लगा इसलिए मैंने तुम्हें नाम दिया । मेरे द्वारा हमेशा इसी नाम से पुकारी जाओगी । मेरे साथ , साथ तुम रहने लगी और पहला शब्द भी बुआ ही बुलाया तुमने । बाबा की दुलारी नतिनिया , हमेशा नातिन कहकर बुलाते और प्यार से दौड़कर तुम बाबा के लिए पानी लेकर आती । बाहर लगे एलोवेरा को तोड़कर सबके चेहरे लगाती रहती थी । ये तुम्हारे बचपन की बहुत सारे यादें है मेरी डायरी में कई पन्नों पर कैद है तुम बड़ी होगी डायरी और तुम्हारी सारी फोटो बचपन की ढ़ेर सारी मिलेगी ।
आज तुम छः साल की हुई , धीरे -धीरे बड़ी हो रही अब तुम समझदार भी हो गई । अपने कपड़े और समान सब बड़े करीने से रख लेती हो तुम्हे सजने का भी बहुत शौक है । छोटी होकर अपने कपड़े का चुनाव भी स्वयं कर लेती हो तुम्हे जीन्स और टाइट कपड़े नही पसन्द है । ये तुम्हारी पसन्द की छोटी सी बातें रही ।
अब स्कूल भी जाती हो , स्कूल की गतिविधियों से मैं अनजान हूँ ,लेकिन बताने से स्कूल अच्छा है ,वहाँ का परिवेश अच्छा है तुम्हारा वहाँ मन लगता है ।अब पढ़ाई -लिखाई में मन लगने लगा है । तुम्हे चित्र बनाना और रंगों से चित्रों को सजाना अन्य विषय की अपेक्षा ज्यादा रुचिकर है । अच्छा है ।
इसबार हम सब बाबा के न रहने पर एक बार पुनः उदासी जीवन मे प्रवेश होने लगा । उदासी हमेशा जीवन वृत्त के साथ व्यक्तित्व को मोड़ देती । मैं नही चाहती तुम इतनी छोटी होकर मायूस रहो खुश रहो । ये दुनिया बहुत खूबसूरत है , प्रकृति ही सब कुछ है इसलिए हमेशा प्रकृति का अनुसरण करो । प्रकृति तुम्हे हमेंशा ऊर्जावान बनाये रखेगी । सूर्य और चंद्रमा से सीखो , तारों के मंडल और पृथ्वी और आकाश के विस्तारण से ,हवाओं की गतिविधियों के साथ अग्नि की प्रखरता को पहचानने की कोशिश करो । देखो और स्वयं से निरीक्षण करो । सबके चेहरे को परखने की सूक्ष्म दृष्टिकोण तुम्हारे भीतर पनप सके । जानो दुनिया के अगणित हिस्से में भाँति -भाँति के लोग है मेरी तुम्हारी दुनिया घर भी है । एक अपरिचित अनजान से हम इस दुनिया मे अपने अथक परिश्रम और सत्कर्मो के साथ अच्छे चरित्र से जाने जाते है । पढ़ाई और उम्र के साथ तुम देश , राज्य , जिला ,वर्ग ,समुदाय , आदि के विषय मे अध्ययन करती रहोगी ऐसी ही अपेक्षाएं रखते है सब । इस जन्मदिन पर मेरा और बाबा की तरफ से खूब आशीर्वाद । खूब आशीर्वाद बाबा के शब्द है । आशीर्वाद ।