अझुवा में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के चलते अवैध रूप से चल रहे क्लीनिक व पैथालाॅजी को सीज किए जाने का भी नहीं है डर, झोलाछापों पर कोई असर नहीं

अझुवा/कौशांबी

अझुवा मे बीसों साल से बिना डिग्री और रजिस्ट्रेशन के बाकायदा क्लीनिक चलाने वाले झोलाछापों पर कल जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर कस्बा पहुंचे डिप्टी सी.एम.ओ. और उनकी टीम द्वारा एक क्लीनिक और पैथालाजी को सीज किए जाने का कोई असर नही पड़ा ।

सब्जी मंडी स्थित एक झोलाछाप की क्लीनिक सहित कस्बे के कई झोलाछाप आज सुबह से ही अपनी नीम-हकीमी की अवैध दुकान सजाए बैठे हैं । जिनमे मरीजों की भीड़ लगी हुई है। विभाग मे अपनी सेटिंग और ऊंची पहुंच की अकड़ पर अवैध धंधा करने वाले झोलाछापों को छापेमारी की पूर्व सूचना कौन देता है जिस पर ये छापा पड़ने से पहले ही अपनी दुकाने बंद कर फरार हो जाते हैं । यह जिले के स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है। क्या वाकई जिले का स्वास्थ्य विभाग असरदारों के दबाव मे कार्य कर रहा है ? या फिर जिले के स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारी स्वयं भ्रष्टाचार मे संलिप्त होकर ऐसे नीम-हकीमों पर कार्यवाही नहीं करके लोगों की जान के साथ जोखिम का कार्य करा रहे हैं? ! यदि जिले के स्वास्थ्य विभाग के मुखिया वास्तव इस मामले मे संजीदा हैं तो बिना किसी मातहत को छापे की सूचना दिए अचानक जांच टीम झोलाछाप की क्लीनिक पर सीधे आकर छापामारी क्यों नही करती यह एक बड़ा सवाल है?

कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मे पोस्टेड चिकित्साधिकारी तीन माह से अधिक समय से ड्यूटी पर नही आ रहे।स्टाफ के अनुसार लंबे समय से उनकी ड्यूटी जेल मे लगी है ऐसे मे बीस हजार से अधिक की आबादी वाले कस्बे के मरीज बीमार पड़ने पर इलाज के लिए कहां जाएं?इतने लंबे समय से सरकारी अस्पताल मे चिकित्साधिकारी मौजूद नही तो सरकारी प्राथमिक अस्पताल मे मेडिकल अफसर को मरीजों के लिए सुलभ कराए जाने की जिम्मेदारी किसकी है?ऐसे मे कस्बे के तमाम गरीब मरीज और उनके परिजन झोलाछापों के मंहगे इलाज के लिए कर्ज लेकर इलाज कराने को मजबूर हों इस बात को महकमे के जिले के जिम्मेदार अधिकारी को समझना होगा।

        अरविंद केसरवानी, पत्रकार/अझुवा