आम का बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था काफी संवेदनशील : सुरेश

फ़ोटो:आम के पेड़ पर लगा बौर

● जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायिनिक दवाओं का छिड़काव करें

जिला उद्यान अधिकारी सुरेश कुमार ने आम बागवानों से कहा है कि प्रदेश में आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के समसामयिक महत्त्व के कीट एवं रोगों का उचित समय पर प्रबन्धन अत्यन्त आवश्यक है । क्योंकि बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था काफी संवेदनशील होती है । ऐसे में आम की फसल को मुख्य रूप से भुनगा एवं मिज कीट तथा खर्रा रोग से क्षति पहुंचने की सम्भावना होती है।

उन्होंने बताया कि भुनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मि०ली० प्रति/लीटर पानी की दर से क्लोरोपाइरीफास 2.0 मि०ली०/लीटर पानी अथवा डायमेथोएट 2.0 मि०ली०/लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें ।

इसी प्रकार खर्रा रोग के प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठलो पर सफेद चूर्ण के समान फफूंद की वृद्धि दिखाई देने पर ट्राइडोमार्फ 1.0 मि०ली० या डायनोकेप 1.0 मि०ली०/ लीटर पानी की दर से भुनगा कीट के नियत्रंण घोल बनाकर छिड़काव करें।

उन्होंने बागवानों को सलाह देते हुए कहा है कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक

दवाओं का छिड़काव करें जिससे परागण क्रिया प्रभावित न हो सके।