नहीं ये जानता कोई
कैसा भगवान होता है?
मगर सच है यही तो बस
पिता भगवान होता है।
हाल बेहाल होता है
बेटे की ढाल होता है।
औलाद के खातिर पिता
पूरा संसार होता है।
जमाने से झगड़ता है
नसीबों से उलझता है।
बेटे के एक आंसू पर
सब कुर्बान करता है।
कभी दिखता गरम लावा
मगर मक्खन से कोमल है।
खुशी बेटे को मिल जाये
पिता सब वार देता है।