खेत से मार्ग तक छुट्टा मवेशी, राहगीर व किसान परेशान

कछौना, हरदोई। विकासखंड कछौना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र से नगर तक व राजमार्ग से संपर्क मार्गों तक छुट्टा जानवरों के आतंक से राहगीरों व किसानों के सामने ज्वलंत समस्या है। बताते चलें छुट्टा पशुओं के आतंक से किसानों को अपनी फसल बचाना काफी मुश्किल हो गया है।

लखनऊ-हरदोई राजमार्ग पर केदारनाथ फिलिंग स्टेशन के पास व कोतवाली कछौना परिसर में व कोतवाली के सामने राजमार्ग पर सैकड़ों की संख्या में आवारा पशु विचरण करते हैं। जिन की चपेट में राहगीरों को आने से गंभीर घायल हो जाते व असमय मृत्यु के घाट भी उतर जाते हैं। वही ग्राम सेमरा कला, महरी, लालपुर, समसपुर आदि गांवो सहित दर्जनों ग्रामों में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा मवेशी किसानों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं। वर्तमान समय में किसानों द्वारा धान की रोपाई के लिए तैयार की गई पौध को छुट्टा मवेशी नष्ट कर रहे हैं। किसान धान की रोपाई न हो पाने से जीविकोपार्जन के लिए चिंतित है।क्षेत्र के लोगों ने छुट्टा मवेशियों को पशु आश्रय स्थलों में बंद कराने की मांग की है। बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाने से सैकड़ों की तादाद में छुट्टा मवेशियों ने गांवों में भी डेरा डाल रखा है। वहीं कछौना क्षेत्र के गौ-आश्रय स्थलों में छुट्टा जानवरों की दुर्दशा हैं।

वर्तमान में गौवंश सड़क दुर्घटना व रेल दुर्घटना व खेतों में लगे कटीले तारों से घायल होकर तड़प तड़प कर मरने को विवश हैं। वही किसान आवारा पशुओं से फसल बचाने के लिए रात रात भर रतजगा कर रहे हैं। जिसमें सैकड़ों किसानों की हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो जाती हैं। यहां तक किसान बुवाई व रोपाई भी नहीं कर पा रहे हैं। जिसको लेकर किसानों में आक्रोश है। गाय भारतीय संस्कृत का आधार है। इसलिए गाय को पवित्र माना गया है। जिसके सभी उत्पाद दूध, दही, मक्खन, घी, गोबर, मूत्र पवित्र माने जाते हैं। जिससे शरीर हष्ट पुष्ट बनता है। वर्तमान परिवेश में गौवंश की बुरी दुर्दशा है। कृषि कार्य मशीनरी सिस्टम पर निर्भर होने के कारण किसान इन्हें आवारा छोड़ देते हैं, क्योंकि कृषि कार्य में यह अनुपयोगी हो चुके हैं। जिससे यह काफी संख्या में बढ़ गए हैं। गौशाला, कांजी हाउस में काफी अवव्यवस्थाएं हैं। वही ग्राम सभाओं में सार्वजनिक भूमि चारागाह, खलिहान, तालाब, बंजर भूमि पर अवैध रूप से ग्रामीणों ने कब्जा कर रखा है। जिसके चलते इन्हें चरने की समस्या खड़ी हो गई है। आवारा पशुओं के साथ किसानों की बड़ी दुर्दशा है। किसानों ने अपनी फसल को बचाने के लिए ब्लेड वाले तार खेतों लगा रखे हैं। उन की चपेट में आने से आए दिन बेजुबान पशु तड़प तड़प कर मर जाते हैं। गांवो में इन पशुओं के शव को दफनाने का कोई प्रावधान नहीं है। जिसके चलते मृत गौवंश खुले में पड़े रहते हैं। जिनसे काफी दुर्गंध फैल जाती है। क्षेत्र में इस दुर्गंध से संक्रामक बीमारी फैलने की प्रबल संभावना बनी रहती है।

गौवंश संरक्षण की योजनाएं केवल कागजों पर ही संचालित होती हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण क्षेत्र में खुले गौ आश्रय स्थल हैं, जहां पर गौवंशों को चारा के नाम पर केवल भूसा दिया जाता है। इन केंद्रों पर सोलर लाइट टूट चुकी हैं, जहां तक सोलर लाइटों की बैटरी भी चोरी हो गई है। केयर टेकरों को कई महीनों से मानदेय न मिलने के कारण देखरेख में रुचि नहीं लेते हैं। जिससे यह बेजुबान पशु चारा पानी के अभाव में असमय मृत्यु के शिकार हो रहे हैं। जिन्हें गौ-आश्रय स्थल के पास में खुले में डाल दिया जाता है। दफनाये न जाने के कारण काफी बदबू फैलती है। वहीं गौ-आश्रय स्थलों में नियमित सफाई न होने के कारण काफी गंदगी बनी रहती है।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता