फॉलोअप– अझुवा क्षेत्र मे कच्ची शराब के कुटीर उद्योग का मामला

विजय कुमार, अझुवा

क्षेत्र मे तमाम प्रयास के बावजूद कच्ची शराब के निर्माण व व्यवसाय मे कमी न आने की मुख्य वजहें

बताते चलें कि कौशांबी के सैनी थानान्तर्गत अझुवा क्षेत्र कौशांबी जिले के सीमावर्ती इलाके मे पड़ता है जहां पिछले कई दशकों से अवैध कच्ची शराब बनाने और बेचने का व्यवसाय वृहद रुप लेते हुए अब कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। ऐसा नही कि पुलिस ने इस बेलगाम होते गैरकानूनी धंधे को रोकने के प्रयास नही किए अपितु हर दो चार माह के अंतराल पर दशकों से इस अवैध धंधे पर आबकारी व पुलिस की छापेमारी होती रही है जिसमे भारी मात्रा मे इस गोरखधंधे से जुड़ा माल और उपकरण पुलिस के हत्थे चढ़ते रहे हैं लेकिन फिर भी इस पर लगाम लगने के बजाए यह क्यों वृहद रूप लेता गया और आज अझुवा क्षेत्र का नाम अवैध शराब के धंधे के लिए एक कुख्यात क्षेत्र के रूप मे बदनाम हो चुका है? इसके पीछे की वजहों की जब पड़ताल खंगाली गई तो जो तथ्य उभरकर आ रहे हैं वे भयानक हैं।

‘जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का’ की तर्ज पर दशकों से पुलिस चौकी मे जड़ जमाए दलालों द्वारा इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों से बराबर धन उगाही कर उन्हे संरक्षित करने और ऊपर से होने वाली कार्यवाही की पूर्व सूचना देकर मौके पर उन्हे वही दलालों द्वारा बचाने, जो लोग माहवारी देने मे आनाकानी करें उन पर छापे डलवाकर कार्यवाही करवाकर पुलिस का गुडवर्क कराने, जो लोग पुलिसिया कार्यवाही से बार-बार आजिज आकर धंधा खत्म करके कुछ दूसरा काम करें उन पर जबरिया फर्जी तरीके से पुलिस द्वारा आर्थिक उत्पीड़न कराकर उन्हे फिर इस गर्त मे धकेलने जैसे गंभीर तथ्य खुलकर सामने आ रहे हैं। ऐसे मे पुलिसिया कार्यवाही बेमानी होती जा रही है।

जब तक अवैध शराब से जुड़े दलालों की नस नहीं तोड़ी जाएगी और अवैध वसूली रुकवाकर बिना स्थानीय पुलिस को पहले से संज्ञान दिए औचक छापेमारी करके अवैध शराब से जुड़े कारोबारियों पर बड़ी तादाद मे कठोर कार्यवाही नही की जाएगी तब तक पुलिस के लिए पहले से सजाए गए ऐसे गुडवर्कों से इस अवैध कारोबार से क्षेत्र को मुक्ति दिलाकर तमाम परिवारों पर सामाजिक बुराई शराब के कारण होने वाले पारिवारिक उत्पीड़न को कम करने के बारे मे सोचना सिर्फ ख्याली पुलाव पकाने जैसा है।स्थानीय स्तर पर इस मामले मे चौकी के दलालों से पुलिस को दूरी बनाकर अवैध उगाही को रोकवाते हुए क्षेत्र मे जहां-जहां शराब बनती है वहां निष्पक्ष होकर औचक छापे डालते हुए इसके कारोबारियों पर कठोर कार्रवाई हो तो निश्चित तौर पर इस बढ़ते अवैध कुटीर उद्योग पर लगाम लगाई जा सकती है। इसके लिए पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को ठोस रणनीति बनाते हुए इसे अंजाम तक पहुंचाने की जरूरत है वर्ना ऐसे ही भावी पीढ़िया नशे की लत मे पड़कर बर्बादी के कगार पर पहुंचते हुए अपनी जिंदगी तबाह करके अपने परिवार का भविष्य नष्ट करते रहेंगे।