व्यंग्य- ‘सामान्य वर्ग’ का अभिशाप

आदित्य सिंह-


उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में तीन सदस्यीय साक्षात्कार बोर्ड ने पूछे मुझसे ये प्रश्न…

1) माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में कितने तरह के चार्ट बनाये जा सकते हैं?
2) माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में एक्टिव सेल्स क्या हैं?
3) इबादतखाना की स्थापना किसने की?
4) अकबर ने एक नये धर्म की स्थापना की थी, उसका नाम क्या है?
5) किस महाद्वीप से होकर तीनों रेखाएं (कर्क रेखा, विषुवत रेखा और मकर रेखा) गुजरती हैं?
6) अकबर के नवरत्न में शामिल तानसेन का वास्तविक नाम क्या है?
7) राजा राममोहन राय को ‘राजा’ की उपाधि किसने दी?
8) लोहे को जंग से बचाने के लिए क्या किया जाता है?
9) अनॉक्सी श्वसन क्या है और इसमें कौन सा उत्पाद बनता है?
10) स्टोमेटा कहां पाया जाता है और इसका कार्य क्या है?
11) वर्ष 2015 में किन्हें ‘भारत रत्न’ दिया गया है?

प्रश्न संख्या 1, 2, 6 का उत्तर देने में असमर्थ और साथ ही 11 वें प्रश्न का उत्तर देने में एक बड़ी गलती हुई। ‘स्वर्गीय श्री मदन मोहन मालवीय’ के स्थान पर मैंने ‘श्री मदन मोहन मालवीय’ बोल दिया।
बोर्ड अध्यक्ष ने ‘स्वर्गीय’ शब्द का प्रयोग न करने के लिए मुझे बीच में टोका। मुझे लगता है कि सॉरी बोल कर मैं भरपाई करने में असमर्थ रहा। इसके बाद सबक लेते हुए, वर्ष 2015 में भारत रत्न पाये दूसरे व्यक्ति श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के लिए ‘पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी’ बोला।

मुझे लगता है कि साक्षात्कार में कुल तीन गलत जवाब, एक लापरवाही भरा जवाब व लिखित परीक्षा में 75/90 अंकों के साथ-साथ ‘सामान्य वर्ग’ के अभिशाप को लेकर मैं अंतिम सूची से बाहर हो जाऊंगा।
मुझे कम से कम 84+ अंकों के साथ लिखित परीक्षा पास करना चाहिए था।

खैर, जो हो गया वो बदला नहीं जा सकता।
अगला लक्ष्य उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा नवंबर में आयोजित समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2016 है।