मार्ग प्रशस्त करो प्रभु मेरा, सिया राम संग डालो डेरा

पवनपुत्र को समर्पित मौलिक रचना 


रचयिता- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’


हे हनुमान दर्शन दो
हे हनुमान हे बलवान, हम सब बालक हैं अज्ञान। 
मार्ग प्रशस्त करो प्रभु मेरा, सिया राम संग डालो डेरा।।
जीवन अंधेरी नगरी सा, मम उजियारा अरमान।
हे हनुमान……………………………………………………………।।
महिमा तेरी सुनी-सुनाई, जल्दी आओ न देर लगाई।।
तेरे सहारे जीवन हमरा, रखियो प्रभु जी ध्यान।
हे हनुमान………………………………………………………………..।।
सीता की तुम पता लगाई, क्षण मा लंका दियो जलाई।
अक्षय कुमार अहिरावण के, हर लीन्हें तुम प्रान ।
हे हनुमान……………………………………………………………………।।
चारों युग में डंका बाजे, भक्त बुलाएं वहां विराजे।
कैसे बुलाऊँ प्रभु आओगे, नहिं पूजन-पाठ विधान।
हे हनुमान…………………………………………………………………।।
परेशान मन के हो सहारा, संकट हर सकते हो हमारा।
‘परेदशी‘ दर्शन चाहे अब, प्रभुजी दो वरदान ।।
हे हनुमान………………………………………………………………………।।


रचयिता- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’,

मौलिक रचना दिन- मंगलवार, दिनांक-20.11.2018,

समय- 01ः59 सायं, स्थान- हमारा पम्प बघौली, अमित