हरदोई-
- महिला सुरक्षा के दावों की खुली पोल विक्षिप्त ।
- गर्भवती को कलेक्ट्रेट के खुले परिसर में हुआ प्रसव ।
- तमाशबीनों की लगी रही भीड़ किसी ने नही की मदद ।
- स्वास्थ्य विभाग को भी हुई सूचना फिर भी नही पहुंचा कोई कर्मचारी ।
- नवजात बालक को लेकर सड़क पर घूमती रही महिला ।
- मदद को नही बढ़े शासन प्रशासन व स्वयंसेवी संस्थाओं के हाथ ।
- जननी सुरक्षा के दावों पर सवाल आखिर कैसे नौ महीने तक सड़कों पर घुमती रही गर्भवती किसी अधिकारी की क्यों नही पड़ी निगाह?
- मामले में जवाबदेही से बचे अफसरों ने साधी चुप्पी कोई भी बोलने को तैयार नही ।
हरदोई- कलेक्ट्रेट में हुई एक घटना ने महिला सुरक्षा से लेकर जननी सुरक्षा तक के सरकारी दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। यहां एक विक्षिप्त महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बावजूद कई घंटे तक भी महिला को इलाज नहीं मिला।महिला ने प्रसव पीड़ा के चलते सड़क पर ही पेड़ के नीचे एक बच्चे का जन्म दे दिया ये देख यहां तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन किसी ने उसकी मदद करने की कोशिश तक नहीं की। हालांकि लोगों ने 108 एंबुलेंस को जरूर सूचित कर दिया। इसके बावजूद यहां करीब दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। जबकि यहां से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर ही जिला व महिला अस्पताल स्थित है।इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए सभी अधिकारियों ने मौन वृत धारण कर रखा है।
कलेक्ट्रेट में बेसहारा महिला ने दूसरी बार एक बच्चे को जन्म दिया।बताया जाता है कि यह विक्षिप्त महिला काफी समय से कलेक्ट्रेट परिसर में रह रही है और उसके एक पहले से लड़की है वह भी कलेक्ट्रेट परिसर में ही भगवान के भरोसे जनी थी।बीते 2 साल से एक अर्ध विक्षिप्त महिला खुद को बेसहारा बता कर कलेक्ट्रेट परिसर में रह रही है।महिला के खाने पीने का इंतजाम कलेक्ट्रेट में आने जाने वाले लोगों द्वारा की जाने वाली आर्थिक मदद ही है ।मंगलवार को सुबह इसी महिला ने दोबारा खुले में ही फिर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
यहां यह बताना जरूरी है कि उक्त महिला के पास एक 2 साल की बच्ची पहले से ही है जिसका जन्म भी यही कलेक्ट्रेट परिसर में हुआ था।बताया जाता है कि प्रसव पीड़ा से जूझती उक्त महिला को न तो स्वास्थ्य सेवाएं ही मिली और ना ही स्वयंसेवी संगठनों का भरोसा।ईश्वर का न्याय तो देखिए उक्त महिला ने खुद ही बगैर किसी की मदद से बच्चे को जन्म दे दिया उसके बाद खुद ही बच्चे को लेकर धूप में बैठ गई।कहना गलत नहीं होगा कि कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने उक्त महिला का ठिकाना रहा है और बीते 13 नवंबर से एससी एसटी एक्ट के विरोध में लगातार अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद का धरना प्रदर्शन भी चल रहा है लेकिन किसी का कोई ध्यान इधर नही गया।फिलहाल उक्त महिला और उसका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं सामाजिक सेवा का दंभ भरने वाले स्वयंसेवी संस्थाएं और स्वास्थ्य सेवाओं के कर्ता धर्ताओं की तरफ से भी कोई सहयोग नही मिला है।वहीं इस घटना ने सरकार के महिला सुरक्षा और जननी सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर एक विक्षिप्त महिला नौ महीने तक गर्भवती होने पर सड़कों पर ही घूमती रही? उसे समय पर संभाला नहीं गया?।