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बच्चों का रूझान बढ़ाने के लिए स्कूल को बना दिया बस

मनोज तिवारी


             हरदोई- प्रदेश में इंग्लिश मीडियम स्कूलों के रहन सहन का प्राइमरी स्कूल कभी भी मुकाबला नही कर सका लेकिन कुछ अध्यापकों की सोंच ने बच्चो को स्कूल आने के नए नए तरीके इस्तेमाल किये जा रहे है ताकि बच्चे स्कूल आये और मन लगाकर पढ़ाई कर सके।कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सण्डीला के अंतर्गत आने वाले जलालपुर की प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका ने।अध्यापिका की सोंच और क्रियान्वयन के चलते बच्चे स्कूल आने के प्रति आकर्षित हो रहे है और मन लगा कर पढ़ाई भी कर रहे है।गांव के प्रधान और लोगों का कहना है कि बस सोंच बदलिए देश आगे बढ़ जाएगा।
             तस्वीर है हरदोई के सण्डीला विकास खण्ड के प्राइमरी स्कूल जलालपुर की।यहां की प्रधानाध्यापक और उनकी टीम ने रंग रोहन कर स्कूल को एक बस की तरह बना दिया यही नही इस स्कूल में रसोई से लेकर शौचालय तक खूबसूरत बनाया गया जिसके बाद क्षेत्र में जहां प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है वही पढाई का स्तर भी अच्छा हुआ है।इसके पीछे की सोंच है बस के माध्यम से मॉडल स्कूल तौर पर पेश किया जाना है जिससे स्कूल को एक नई शक्ल के साथ बच्चों के आकर्षण का केंद्र बना कर उनका ध्यान पढ़ाई की तरफ आकर्षित किया जा सके।अध्यापिका ने इलाके के सभी लोगों को आपसी सहयोग से समाज में इसी तरह के रचनात्मक कार्य करने की अपील की।
           तस्वीरे है हरदोई में सण्डीला के प्राइमरी स्कूल जलालपुर की।स्कूल देखने मे लगता है कि कोई नई बस खड़ी है ।पर दूर से दिखने वाली ये बस कोई बस नही एक प्राइमरी स्कूल है जिसे प्रधानाध्यपक और स्कूल की टीम ने रंग रोहन कर नया रूप दिया है।तस्वीरों में आप देख सकते है कि शौचालय भी एक एक ख़ूबसुरत दिख रहा है और बच्चों के हाथ धोने के वास बेसन का इंतजाम भी है।पढ़ने वाले बच्चों के कमरे भी खूबसूरत दिख रहे है।दरअसल बच्चो में स्कूल के प्रति अकर्षन पैदा करने के उद्देश्य से ये सब किया गया ताकि स्कूल आने पर उनका मन परफाल्वित रहे और वो मन लगा कर पढ़ाई कर सके।
          बता दें कि जिले के प्रत्येक ब्लॉक में 5 स्कूलों को इंग्लिश मीडियम किया गया था उसी के तहत विद्यालय इसी सत्र यानी अप्रैल से इंग्लिश मीडियम से संचालित किया गया।अध्यापकों ने बताया कि नए सत्र से कक्षा 1 के बच्चों को सुरुवात से ही अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है और इसके बाद इसके अलावा 2 से 5 तक के बच्चों को पहले इंग्लिश व उसके बाद उसी को हिंदी में पढ़ाया जाता है ताकि समझ मे आ सके।अध्यापकों के इस पहल की ग्रामीणों ने भी सराहना की है और सहयोग की बात भी कर रहे है।क्योंकि स्कूल के कमरों को बस के रूप में तैयार करवाया है कक्षा को बस के रूप में देखकर बच्चे अपने आप ही इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं।कमरों के आगे विभिन्न डिजाइन बनाई गयी है इसके साथ ही प्रधानाचार्य हर समय स्टाफ को साथ लेकर स्कूल की साफ-सफाई सहित पेड़-पौधों की देखभाल करते हैं।अध्यापिका का कहना है कि कुछ नया करने की चाह में उन्होंने स्कूल के स्टाफ की सहायता से रंगरोगन कर इसे बस का लुक दिया है इससे बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जन सहयोग से ग्राउंड में प्लेटफार्म बनाने की कोशिश करेंगे।
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