‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज किसी योग्य व्यक्ति को एक स्कूल में नौकरी नहीं मिल पा रही है; वहीं दूसरी ओर, एक महिला शान के साथ एक साल से अधिक समय तक एक साथ २५ स्कूलों में अध्यापक की नौकरी करती आ रही थी। आश्चर्य का विषय है कि लगातार वह पच्चीसों स्कूलों में नौकरी करती रही और सम्बद्ध विभाग को हवा तक नहीं लग पायी। इतना ही नहीं, वह उन सभी स्कूलों से नियमत: लगभग १ करोड़ रुपये वेतन के रूप में निकाल चुकी है। जैसे ही उस महिला अध्यापक को इस बात की भनक लगी कि उसके कदाचार और दुष्कृत्य का पर्दाफ़ाश हो चुका है, वह २६ मई, २०२० ईसवी को इस्तीफ़ा देकर अपने घर बैठ गयी थी।
वह शातिर महिला अध्यापक 'मैनपुरी' (उत्तरप्रदेश) की रहनेवाली है, जिसका नाम अनामिका शुक्ला है।
उत्तरप्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पारदर्शिता लाने के लिए अध्यापकों का डिजिटल डाटा बेस तैयार किया जा रहा था। उसी समय अनामिका शुक्ला का 'गोरखधन्धा' सामने आया था। उसका नाम बार-बार आने से सम्बद्ध विभाग के कान खड़े हो गये। अब, जब लगभग एक करोड़ रुपये की चपत लगानेवाली उस महिला की कारस्तानी पर से पर्दा पूरी तरह से उठ गया है, उत्तरप्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने उसके पास आरोपपत्र भेजकर उससे जवाब माँगा है; किन्तु वह धूर्त्त महिला मौन साधे हुए है।
ज्ञातव्य है कि आरोपिता अनामिका शुक्ला का नाम कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के २५ विद्यालयों :-- प्रयागराज, अम्बेदकरनगर, अमेठी, अलीगढ़, बागपत, सहारनपुर आदिक की पंजिका में विज्ञान-विषय की अध्यापक के रूप में अंकित है; परन्तु वह नियमित रूप से बछरावाँ (रायबरेली) के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में पढ़ाती थी। उक्त प्रकरण की गम्भीरता को समझते हुए, अब 'राज्य परियोजना कार्यालय' ने तथ्य जुटाने आरम्भ कर दिये हैं।
उसके नितान्त गम्भीर कृत्य के पीछे कई असरदार लोग भी शामिल होंगे, इससे इंकार नहीं किया जा सकता । उस महिला शिक्षक से अधिक उत्तरदायी सम्बन्धित विभागों के अधिकारी हैं, जिसका एक साथ पच्चीस विद्यालयों में शिक्षक के रूप में लम्बे समय तक नाम अंकित थे; परन्तु उसकी कोई धर-पकड़ न हो सकी थी। उसके जघन्य कृत्य और अक्षम्य पाप सिर चढ़ कर बोलने लगे हैं तब वह त्यागपत्र देकर घर बैठ गयी है ।
यह अत्यन्त गम्भीर विषय है। इसकी तो सी० बी० आई० जाँच होनी चाहिए, ताकि पर्दे के पीछे के अन्य कलाकार भी सामने आ सकें।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ जून, २०२० ईसवी)