उच्चतम न्यायालय ने आपसी सहमति और अंतर जातीय विवाह करने वाले व्यस्कों को राहत देते हुए ऐसे मामलों में खाप पंचायतों के हस्तक्षेप को पूरी तरह गैर कानूनी बताया है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानवलिकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने हस्तक्षेप रोकने के लिए कानून बनाने के दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि यह दिशा निर्देश तब तक लागू रहेंगे जब तक संसद इस संबंध में उचित कानून नहीं बना लेती।