क्या सचमुच यह “मेरे सपनों का भारत” है– महात्मा गांधी जी?
मैं आपसे इसलिए पूँछ रहा हूँ क्योंकि मेरा भारत अब मुर्दों का शहर बन चुका है!
मैं आपसे ही यह सवाल इसलिए कर रहा हूँ ताकि मेरे सवाल करने से किसी और की मानहानि न होगी!
मैं इसलिए आपसे यह सवाल कर रहा हूँ क्योंकि आपने तो मेरे दादा जी को समाजवाद की परिभाषा कुछ और ही सिखाकर गए थे!
फिर चूक कहाँ हुई?
क्या आपकी शिक्षा सत्य व अहिंसा से ज्यादा पावरफुल था मेरे दादा जी व पिता जी का स्वार्थपन?
बताइये न बापू जी
अब आप ही बचे हो इस मुर्दा भारत में, यदि मैं किसी मुर्दे से पूंछूँगा तो डरता हूँ कहीं उसके मान की हानि न हो जाये..!
इसलिए अब तो आपको अपना मौन फिर तोडना होगा और फिर से
रघुपति राघव राजाराम।
पतित पावन सीताराम।
ईश्वर अल्लाह एक ही नाम।
सबको सन्मती दे भगवान॥ गुंजायमान करना होगा।
(राम गुप्ता, स्वतंत्र पत्रकार)