श्री गंगा आरती सेवा द्वारा कछला घाट आयोजित कवि सम्मलेन में देर शाम तक धर्म, संस्कृति एवं साहित्य की त्रिवेणी में संस्कृतिप्रेमियों साहित्य का रसास्वादन किया , मां गंगा के तट पर आयोजित इस आयोजन में आमंत्रित कवियों ने कविताओं में गंगा माँ के गुणगान को प्रस्तुत किया और साथ ही साथ गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल रखने के लिए सन्देश भी दिया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ बदायूं विधायक महेश चंद्र गुप्ता, बिल्सी विधायक राधा कृष्ण शर्मा, दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य, पूर्व विधायक प्रेम स्वरुप पाठक, जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। समस्त जनप्रतिनिधियों एवं गंगा आरती समिति ओर से समस्त कवियों को माला पहना कर एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। डॉ. सोनरूपा विशाल द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गयी की गयी, उसके बाद प्रारम्भ हुए कवि सम्मेलन में ओज कवि कुलदीप अंगार ने कहा
दूर-दूर तक फैली हुई है रजत-राशि
चारों दिशाओं के छोर नाप रही गंगा माँ ।
कभी लगता है काल-चक्र गति भाँप रही
कभी रोष-कोष लिये काँप रही गंगा माँ ।
दातागंज के शायर समीर ने कहा,
अमृत से कुछ कम नहीं, गंगा जी का नीर
भव बंधन से मुक्त हो पीकर इसे ‘समीर’
कवि सम्मलेन के संयोजक डॉ. अक्षत अशेष ने कहा
मेरी गंगा तुझे मेरे देश का प्रणाम
हर जाति धर्म-भाषा-वेश का प्रणाम
शेष ओ” विशेष परिवेश का प्रणाम
मेरी गंगा तुझे इस अशेष प्रणाम।
अंतराष्ट्रीय कवियत्री डॉ. सोनरूपा विशाल ने करते हुए कहा,
भारत की संस्कृति, भारत की उन्नति की पहचान!
गंगा है सम्मान हमारा गंगा है अभिमान!
कवि डॉ. अरविन्द धवल ने कहा
बाबा भागीरथ के दुरूह तप से प्रसन्न ,
होके मुस्कराईं मातु गंग को प्रणाम है ।
रोग शोक हारिणी माँ धरती पे आईं और
मोक्ष दायिनी कहाईं गंग को प्रणाम है ।
वरिष्ठ कवि टिल्लन वर्मा ने कहा
गंगातट पर गंगा माँ को शीश नवाने आये हैं
हम माँ-मन्दाकिनी तुम्हारी महिमा गाने आये हैं
युवा कवि अभिषेक अनंत ने कहा
सिर्फ नहीं जल ये गंगा जल
गंगा नदी नहीं है केवल
कवियत्री सीमा चौहान ने कहा,
मै गंगा हूॅ निर्मल सदानीरा
मै अमरलोक से आयी हूॅ
जन जन तुम पुण्य कलश भर लो
मै अमृतमयी जल लायी हूॅ ।।
वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र गरल ने कहा
जय मां गंगे पतित पावनी, मकर वाहिनी छवि सुहासनी ।
गो मुख सें गंगा सागर तक, तेरी धारा ह्रदय भावनी।
कवि कुमार आशीष ने कहा
पतित-पावनी सी बहे जा रही है।
ये हर ज़ुल्म हँसकर सहे जा रही है।।
कि आओ मेरा आचमन तुम भी कर लो,
ये गंगा माँ सबसे कहे जा रही है।
ग़ज़लकार विशाल गाफिल ने कहा
जगत को सबसे पावन हर एक किनारों करि दें
गंगा के धारे कौ फिर गंगा को धारो करि दें |
बरेली से आये हास्य कवि आनंद गौतम ने कहा
धर्म, संस्कृति और राजनीती के नाम पर देख नृत्य नंगा,
आज बहुत शर्मिंदा है अपने बेटी – बेटों से मां गंगा
शायर सुरेंद्र नाज़ ने कहा
वह यमुना नर्मदा गोदावरी सतलज या नंदा हो
सभी ने सीखी बहने की अदा इस गंगा मैया से
कसम खाएं वह दूषित अब कभी होने नहीं देंगे
अगर निस्बत है जिनको भी जरा इस गंगा मैया से
कार्यक्रम अपर जिलाधिकारी राम निवास शर्मा, सी. ओ. उझानी विनय दिवेदी, मंजुल शंखधर, ऋचा अशेष, सारिका गुप्ता, गुरुचरण मिश्रा, संजीव रूप, वीरेंदर ढींगरा, ज्वाला प्रसाद गुप्ता, सतीश चंद्र मिश्रा, डॉ. कमला माहेश्वरी, नरेश चंद्र शंखधर, सुमित मिश्रा, सौरभ शंखधर, समिति के सदस्य प्रदीप गोयल, प्रतीश गुप्ता, हरी अग्रवाल, किशन शर्मा, सौरभ शर्मा, शैलेन्द्र शुक्ल, राजन मेहंदीरत्ता आदि उपस्थ्ति रहें। अंत में जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। सञ्चालन डॉ. अक्षत अशेष ने किया।