‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ का काव्यपाठ और काव्यचिन्तन सम्पन्न

“अख़बारों में छप रहा, हुए टमाटर लाल”

नगर की ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ नामक साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था की ओर से 13 अक्तूबर को चकिया, राजरूपपुर, प्रयागराज के सभागार में काव्यपाठ और काव्यचिन्तन ‘कविसम्मेलन’ के रूप में आयोजित किया गया। पूरे आयोजन की अध्यक्षता भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने की थी। ८५ वर्षीय कविवर बादल प्रयागवासी ने मुख्य आतिथ्य ग्रहण किया। अध्यक्ष और मुख्य अतिथि ने दीप-प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया।

मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करते हुए

प्रतिभा ने संगीतमय सरस्वतीवन्दना कर वातावरण सुमधुर बना दिया। इसी अवसर पर मुख्य अतिथि बादल प्रयागवासी को संस्था की ओर से अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया और उनकी पुस्तक ‘विचार-संग्रह’ का लोकार्पण किया गया। संयोजक डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने काव्यचिन्तन के अन्तर्गत प्रयागवासी के साथ उनके आरम्भिक दिनों की कविता की प्रवृत्तियों पर विमर्श किया। बादल प्रयागवासी का कहना था, “पहले कवियों की संख्या कम थी और वे अध्ययन करते थे; सीखते थे; परन्तु आज की स्थिति विपरीत है।” उसके बाद काव्यपाठ आरम्भ करते हुए केशव सक्सेना ने सुनाया, “मैं हूँ प्रेम पुजारी केशव, प्रेमसुधारस का प्यासा हूँ।” एस०पी० श्रीवास्तव ने सुनाया, “बुरे समय में परखिए, मान और सम्मान। जग में अपना कौन है, हो जायेगा ज्ञान।।” डॉ० प्रदीप चित्रांशी का दोहा था, “ऐ बाबू! मत पूछिए, महँगाई का हाल। अख़बारों में छप रहा, हुए टमाटर लाल।।”

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने यथार्थ का दर्शन कराया,”भगत सिंह! नोटों पर तुम्हारी तस्वीर चस्पा नहीं हुई। मत भूलो तुम पर मेहरबानी की गयी है वरना मुन्नीबाई के कोठे पर जिस्म के बदले तुम्हारा भी सौदा किया जाता।” डॉ० वीरेन्द्र तिवारी ने गीत गाया,”मैं भी ढूँढ़ूँ अपने पीय को, बनके सावन में बदरी।” बादल प्रयागवासी ने पढ़ा, “किसी को किसी रूप में सहारा दे सको तो बड़ी बात है।” अजय पाण्डेय ने सुनाया, “सजे शब्द सुन्दर बने गीत कोई, उसे गुनगुनाऊँ तुम्हारे लिए।” डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने संचालन और दीपक कुमार श्रीवास्तव ने आभार-ज्ञापन किया।