इस संसार में सब कुछ एकात्म है।
एक ही मूल तत्त्व से सब कुछ रचा हुआ है, दूसरा कोई है ही नहीं।
मैं-तू के बीच सभी संघर्ष व्यर्थ हैं।
सब प्रकार की तूतू-मैंमैं निरर्थक है।
संसार में जब एक ही तत्त्व से सब कुछ निर्मित है तो परस्पर विवाद आक्रमण युद्ध संघर्ष धोखा दुर्व्यवहार अपराध इत्यादि का कोई कारण नहीं रह जाता।
हर दूसरा व्यक्ति तुम्हारे लिए दर्पण की भांति है, प्रत्येक दर्पण में तुम खुद ही प्रतिबिंबित होते हो।
इस सत्य का बोध होते ही दूसरों के साथ सब प्रकार के दुराव समाप्त होने लगते हैं, लगाव उत्पन्न होने लगता है।
सत्य के ज्ञान से ही परस्पर प्रेम जागने लगता है।
तब कोई भी मैं किसी भी तू का विरोधी नहीं रह जाता बल्कि उसे न्यायोचित स्थान देने लगता है।
सत्य को जानो मानो और जियो तुम्हारे बीच सभी पारस्परिक झगड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
✍️🇮🇳 (राम गुप्ता – स्वतन्त्र पत्रकार – नोएडा)