उच्चतम न्यायालय का उत्तरप्रदेश-सरकार को लताड़ते हुए, सी० ए० ए०-विरोधी प्रदर्शनकारियों से वसूले गये करोड़ों रुपये लौटाने का आदेश

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

कल (१८ फ़रवरी) उच्चतम न्यायालय की ओर से एक ऐसा आदेश प्रसारित (जारी) किया गया था, जिससे उत्तरप्रदेश-सरकार की अहम्मन्यता को भरपूर ठेस पहुँची है। न्यायालय के आदेशानुसार, उत्तरप्रदेश-सरकार-द्वारा दिसम्बर, २०१९ ई० मे शुरू की गयी ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ (सी० ए० ए०) के विरोध मे प्रदर्शन करनेवाले लोग से दण्डस्वरूप जो करोड़ों रुपये वसूले गये थे, उन्हें सम्बन्धित समस्त आन्दोलनकारियों को वापस किये जायें।

उल्लेखनीय है कि १८ फ़रवरी को ही उत्तरप्रदेश-सरकार की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा गया था कि उसने सी० ए० ए०-विरोधी प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध सार्वजनिक और निजी सम्पत्ति को पहुँचायी गयी क्षति के लिए शुरु की गयी २७४ वसूली (रिकवरी) नोटिस और काररवाई वापस ले ली है। इसी को सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश-द्वय :– डी० वाइ० चन्द्रचूड और सूर्यकान्त की पीठ ने अपने आदेश मे कहा– उत्तरप्रदेश-सरकार उन करोड़ों रुपये को लौटायेगी, जिन्हें उसने प्रदर्शनकारियों से वसूले थे।

स्मरणीय है कि उत्तरप्रदेश-सरकार की ओर से दिसम्बर, २०१९ ई० मे प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध क्षतिपूर्ति करायी गयी थी, जिससे असन्तुष्ट होकर उच्चतम न्यायालय ने उत्तरप्रदेश-सरकार को फटकारते हुए, सभी सम्बन्धित काररवाई को वापस लेने के लिए कहा था; परन्तु उत्तरप्रदेश-सरकार न्यायालय के आदेश की अवहेलना करती रही। उसके बाद न्यायालय ने सुस्पष्ट शब्दों मे आदेश किया था– राज्य की यह काररवाई क़ानून के विरुद्ध है, इसलिए न्यायालय उत्तरप्रदेश-सरकार के काररवाई को अवैध मानते हुए निरस्त कर देगा।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ फ़रवरी, २०२२ ईसवी।)