दिल्ली:- साहित्य संगम संस्थान दिल्ली की महिला साहित्यकारों द्वारा आयोजित चुनावी चकल्लस कार्यक्रम विगत दिनों सम्पन्न हुआ। कहते हैं जीवन में हास्य न हो तो जीवन नीरस हो जाता है। साहित्यकार जितना रुलाने में माहिर होते हैं उतना ही हंसाने में।
साहित्य संगम संस्थान की महिला साहित्यकारों ने इस चुनावी समर में अपना चुनावी बिगुल बजा दिया। लेखक या कवि कल्पना में कुछ भी कर सकता है। कहते हैं न सब थर थर कांप रहें थे कवि सूरज तोड़ कर ले आया।और जब कलम किसी महिला ने पकड़ी हो तो फिर कल्पना असीमित हो जाती है। नारी मंच अनेक सुन्दर कार्यक्रम करता आया है। इस बार हास्य कवि सम्मेलन के रूप में उसकी प्रस्तुति शानदार रही। भारत के अनेक प्रदेशों से महिलाएं उतरी चुनाव में और कहने लगी “सखी हम भी लड़ब चुनाव”। इस कार्यक्रम में अगुवाई कर रही थी लखनऊ की कवयित्री डॉ वन्दना श्रीवास्तव जी तथा कार्यक्रम का सुन्दर नेतृत्व कर रही थी आ.छाया सक्सेना प्रभु जी नारी मंच की अध्यक्षा। कार्यक्रम में शानदार संचालन किया डॉ वन्दना श्रीवास्तव जी एवं उमा मिश्रा प्रीति जी की जोड़ी ने। सभी महिला रचनाकार नेता की वेशभूषा पहन कर बनी एक दिन की मुख्य मंत्री, प्रधानमंत्री और दिए नए नए चुनावी चिन्ह। किसी ने लिपिस्टिक को थामा तो किसी ने बेलन को अपना हथियार बनाया। चुनावी चकल्लस का आनंद ही अदभुत था।कार्यक्रम के देश के विभिन्न प्रान्तों के 25 रचनाकारों ने भाग लिया। इस आयोजन में मुख्य अतिथि कलावती करवा षोडश कला, अध्यक्ष साहित्य संगम संस्थान बंगाल इकाई रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदु शर्मा शचि योगशाला अधीक्षिका ने की।