‘बेवड़ों पर नज़र-ए-इनायत’ ! आख़िर ये कैसा लॉकडाउन है साहब ?

अवनीश मिश्रा, प्रदेश प्रभारी :

जांच के दायरे के बढ़ने के साथ ही पूरे देश में कोरोना विस्फोट होने लगा । कोई सरकार लॉकडाउन लगा रही तो कोई सरकार आरोप । इन सब के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिन पर दिन मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है । आज के ताजा आंकड़ों के अनुसार पूरे प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 2984 हो गई जिसमें से 429 मामले लखनऊ के हैं।

ये कैसा लॉकडाउन है साहब

सरकार और प्रशासन ने आम जनता की लापरवाहियों और अपनी नाकामियों को छुपाने के चलते खुल कर तो नहीं लेकिन गुपचुप तरीके से हाथ खड़े कई दिए हैं। हालांकि कोरोनावायरस फैलाने की जिम्मेदार सरकार नहीं है लेकिन सरकार आम जनता के अभिभावक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट चुकी है।

सम्पूर्ण लॉकडॉउन के समय लोगों के दिलों में जो डर था वो शराब की दुकानें खुलवा के सरकार ने ख़त्म कर दिया था फिर हुआ अनलॉक -१ जिसमें प्रशासन ने अच्छे से ढील देना शुरू किया। संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखते हुए सरकार ने हफ़्ते में दो दिन के लॉकडॉउन की घोषणा कर जिसमें आवश्यक वस्तुओं के लिए दुकानों को छूट दी गई और सबसे मुख्य बात जिसपर पक्ष और विपक्ष सभी सरकारें चलती हैं, शराब उस पर भी इन दो दिनों में कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
ये भी नियम बनाया गया कि जिस क्षेत्र में संक्रमित व्यक्ति पाया जाएगा उस पूरे क्षेत्र को कैंटोनमेंट जोन बना दिया जाएगा लेकिन इसमें भी प्रशासनिक अधिकारियों ने पूर्णतया लापरवाही बरती जिसके चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई अफसरों को तलब भी किया लेकिन उससे भी कोई लाभ नहीं हुआ।

मास्क पर चालान !

नो मास्क पर चालान हो तो रहें हैं लेकिन आज भी प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए कई लोग बिना मास्क के घूमते हैं। मास्क ना पहनने की कसम तो खासकर ग्रामीण लोगों ने खा रक्खी है जहां ना मास्क ना ही सामाजिक दूरी रखते हैं और इनसे तो पुलिस प्रशासन भी हार के नतमस्तक हो गया है।