प्रश्न-
जो मीरा और अर्जुन ने कृष्ण से प्रेम किया, शबरी और भरत ने राम से प्रेम किया, क्या वह प्रेम सत्य के प्रति प्रेम नहीं था…?
उत्तर-
धूर्त लोग जीवित सदगुरु की भक्ति से डरते हैं।
मृत भगवान या कल्पित मूर्ति की भक्ति करते हैं।
सत्य से दूर भागते चले जाते हैं।
क्योंकि मूर्तियां कुछ कहती नहीं है।
इसलिए मृतकपूजा ही अपनी मनमानी करने का सबसे सरल उपाय है।
अनुशासन ही भक्ति है।
सत्यानुशासन किसी जीवित सतगुरु के बिना संभव नहीं।
सत्य को छोड़कर, हरे राम, हरे कृष्ण, हे ईश्वर, हे परमेश्वर, हे अल्लाह, अल्लाह हु अकबर जपकर तबाह हो गए लोग।
सत्य ही खो गया।
जीवित व्यक्ति से नफरत करते रहे।
कल्पित ब्रह्म की उपासना करते रहे मूर्ख और धूर्त लोग।
सत्य के अनादर से ही सब कुछ बरबाद हो गया।
लोग राम नाम जपने के लिए तैयार है, शिर मुढवाने के लिए तैयार है, सड़क पर लेटने के लिए भी तैयार हो जाते है, परन्तु एक कदम सत्यमार्ग पर चलने से डरते हैं।
लोग सोचते हैं कि सत्मार्ग कठिन है।
जबकि सत्मार्ग बहुत ही सरल है, बस शर्त यह है कि सत्य स्वीकार हो…!!!
किन्तु सत्य पर श्रद्धा ही नहीं सिखायी गयी।
सत्य ही ब्रह्म था।
लेकिन ब्रह्म की उपासना तुम कहीं और करते रहे काल्पनिक रूप से।
जब्कि सत्यदर्शन कहता रहा ब्रह्म ही ब्रह्माण्ड हो गया है और ब्रह्म ही व्यक्ति हुआ बैठा था।
तुम्हारे निकट ही।
तुम्हारे चारों ओर विद्यमान था।
जो जितना सच्चा, जितना सत्यनिष्ठ उसमें उतना ही अधिक वह ब्रह्म स्वयं ही व्यक्त था क्योंकि सत्य ही तो ब्रह्म था।
लेकिन इस दार्शनिक सतज्ञान की कमी ने ही बर्बाद किया सबकुछ।
फिर भी अब समय सही दिशा में गतिशील है।
शिक्षा के प्रसार से अब सत्य प्रकाशित हो चुका है और हम सब सतमार्गी बनकर उस सतपथ पर चलना शुरू कर चुके हैं।
धीरे-धीरे बाकी सब भी चलना शुरू करेंगे।
सत्य के सिवा अन्य कोई रास्ता नहीं है उद्धार का।।
सत्य एक सिद्धांत है जो समाज या राष्ट्र में परस्पर न्यायपूर्वक व्यवहार करने का आदेश देता है।
और इस सत्य का दार्शनिक ज्ञान किसी जीवित गुरु जीवित शिक्षक से ही प्राप्त हो सकता है।
मृत या मूर्ति से नही।
किन्तु मूर्खो और धूर्तों ने ही फैलाई
जीवित से नफरत..!
और मृत की उपासना…।।
मूर्ति पर श्रद्धा….!
मूर्तिकार की उपेक्षा…!!
सत्य का अनादर…!
ज्ञान-विज्ञान का तिरस्कार..!!
यह कैसा व्यवहार…???
सतगुरु पर शंका…?
सत्यनिष्ठों की उपेक्षा…??
पडोसी को क्षति…?
परद्रोह में रति…..??
अन्याय में गति…..?
प्रतिद्वन्द्विता में स्थिति..??
मनुष्यों की यह पशुता ही सब कुछ बंटाढार कर गयी।
उठो, जागो, सत्मार्ग पर चलो..!
सत्य को जीवित गुरुजनों से जानो, सत्य को ही मानो, सत्य को ही जियो…!!
सब कुछ ठीक हो जायेगा…!!
सब दुःख दूर हो जायेंगे…!!!
राम गुप्ता,स्वतंत्र पत्रकार, नोएडा