डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
कभी नौकरी को ‘नौकरी’ की तरह से की ही नहीं। वैसे भी कोई इतना मज़बूत खूँटा किसी के पास था भी नहीं कि कोई बाँध सकता। पगहा तुराकर भाग खड़ा होता था। कोई लखेदने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था, काहेंसे कि जब लात मारता था तब बड़े-बड़े सूखल पतई की तरह से उधिया जाते थे।
जब से ‘लभ (लव) जेहाद नाम सुना है तब से हमारा माथा ठनठना रहा है। नौकरी तो कोई देगा नहीं, इसलिए ‘लव ऐण्ड लवेरिया न्यू इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी’ का पेटेण्ट कराने का दिमाग बना लिया है और देश के उद्घाटन-स्पेशलिस्ट नरेन्द्र मोदी से उद्घाटन कराने के लिए सोच रहा हूँ , फेर ना जाने काहें एक डरवा सता रहा है। ऊ ई का, अगर नरेनदर भाई को बुला लिया तो ओहिजे से सीधे रोड शो भी करने लगेंगे। एसे जरा सुचितियाह होकर ‘ठेंगे पर मार दिया के तरज’ पर कुम्भकरणा की तरह से ऊँघियाये हुए अन्ना हजारे काका पर ज्यादा पतिया रहा हूँ।
नरेनदर भाई के बुलावे से एगो डर ईहो सता रहा है कि ऊ बोलने लगेगा : ए पिरथिबिया! आपन लवेरिया कम्पनिया के दरो दीवार को भगवा में रँगायेगा तभी हम आयेगा, उद्घाटन करने।’न्यू इण्डिया तो तू हमारा छाप लिया तो कम-से-कम ‘न्यू इण्डिया’ वाला पोर्सनवा तो भगवा छाप बनाई दे। आ एगो शरत है, उ इ कि पहिले कवनो से उद्घाटन कराइ ले फिर ओकरे पन्दरह दिन बाद हम उद्घाटन करै अइबे। काहें से हम लीक पर नहीं चलता है। देखा नहीं, राजस्थान में जौन रीफाइनरी के उद्घाटन काँगरेसियन कर चुके थे, ओहिका उद्घाटन बड़े ताम-झाम के साथ हम कर आये हैं।
इ तो रही नरेनदर मोदी भाई की शरत। ओइसे हम ऊ जीव हैं, जौन कवनो शरत-वरत में बँधि के काम नहीं करते। हम तो वो छुट्टा साँढ़ है, जौन उजारि-पजारि के बराबर करि देता है।
अब आधी रात के सुस्ताने बइठि के ‘मन की बात’ करेगा फिर बिचारि करेगा कि केका बुलायें आ केका न बुलायें। वैसे मनवा में इहौ बतिया कुलबुलाइ रहा है : काहें न कवनो ‘हिजड़ा’ बन्धु-बान्धव से उद्घाटन कराया जाये।