एक बार फिर महेन्द्रकुमार सिंह ने १७ नवम्बर को प्रयागराज मे अपना पदभार सँभाल लिया है। श्री सिंह का प्रयागराज से गहरा नाता रहा है। यही कारण है कि अब उन्होंने मथुरा और बीसलपुर मे उप-शिक्षानिदेशक एवं प्राचार्य-पदोँ पर रहते हुए, अपने दायित्वों का बहुविध निर्वहण करने के पश्चात् पदोन्नत पाकर उत्तरप्रदेश शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज मे संयुक्त शिक्षानिदेशक (अर्थ) का पदभार ग्रहण कर लिया है।
ज्ञातव्य है कि महेन्द्रकुमार सिंह प्रयागराज मे शिक्षा-विभाग मे विभिन्न पदोँ पर लगभग एक दशक तक रहे। उन्होँने ज़िला शिक्षा एवं प्रशिक्षण-संस्थान (डाइट) मे प्राचार्य, ज़िला विद्यालय निरीक्षक (प्रयाग-मण्डल), उत्तरप्रदेश शिक्षा निदेशालय मे उप-शिक्षा निदेशक इत्यादि पदोँ पर कार्य करते हुए, अपनी अमिट छाप छोड़ी है। यही कारण है कि श्री सिंह जहाँ भी रहे, सबके हृदय मे बसे रहे। उन्होँने शिक्षा के क्षेत्र मे नवाचार, शोध और कर्मशाला-जैसी गतिविधियोँ को प्रमुख दी है। उनका ‘डाइट’ का कायाकल्प करने और उत्तरप्रदेश मे शिक्षा के क्षेत्र मे नाना प्रयोग कर, शैक्षिक संस्थाओँ को समुन्नत करने मे महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। महेन्द्रकुमार सिंह की शिक्षा के क्षेत्र मे पच्चीस से अधिक शोधपत्र देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओँ मे प्रकाशित हो चुके हैँ।
पुन: प्रयागराज मे संयुक्त शिक्षा निदेशक-पद सँभालने पर प्रयागराज के प्रबुद्धमण्डल का मानना है कि उनके विभाग अर्थ (वित्त) से सम्बन्धित जो भी कार्य लम्बित हैँ, उनका निबटारा होता दिखेगा और श्री सिंह की कार्यशैली के अन्तर्गत कोई प्रकरण लम्बित नहीँ दिखेगा।
ईमानदार, कर्मठ छवि, मृदुल व्यवहार और कठोर अनुशासन के लिए जाने जानेवाले महेन्द्रकुमार सिंह का अध्यात्म और ज्योतिर्विज्ञान के साथ गहन लगाव रहा है। यही कारण है कि “सर्वे भवन्तु सुखिन:” के उद्देश्य से उनका नियमित रूप से यज्ञ, हवन, प्रार्थना इत्यादि के साथ दैनिक कार्य प्रारम्भ होता है।