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आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

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अपने क़लम (‘अपनी क़लम’/’अपने कलम’ अशुद्ध प्रयोग है।) को ईमानदारी के साथ अपनी ताक़त (अरबी-भाषा) बनानेवाला अपनी कलानी (फ़ारसी-भाषा; गौरव) को प्राप्त कर अपने हर लफ़्ज़ से दुन्याया (अरबी-भाषा; संसार; दुनिया/दुनियाँ/दुनियां अशुद्ध है।) को शिकस्त (फ़ारसी-शब्द; पराभव,पराजय) की ओर ले जाने की क़ुव्वत (अरबी-भाषा; सामर्थ्य; ‘कूबत’ अशुद्ध शब्द है।) रखता है। यक़ीनन, (अरबी-भाषा; निस्सन्देह) वह अपनी सलाहीयत (योग्यता, विद्वत्ता; अरबी-भाषा; ‘सलाहियत’ अशुद्ध शब्द है। के ज़रीअ: (अरबी-भाषा; माध्यम, द्वारा; जरिया/ज़रिया अशुद्ध शब्द है।) आम (अरबी-भाषा; सर्वसाधारण) को एक नफ़ीस (अरबी-भाषा; उत्तम) नसीहत (अरबी-भाषा; सत्परामर्श) देता आ रहा है। ऐसे में, उसे सभी को चाहिए कि उसका एहतिराम (अरबी-भाषा; समादर करना; ‘एहतराम’ शब्द अशुद्ध है।) करे; ख़ैरमक़्दम (अरबी-भाषा; स्वागत; खैरमकदम/खैरमक़दम अशुद्ध है।) करे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ अगस्त, २०२१ ईसवी।)