★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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हमें नहीं भूलना चाहिए कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ प्रतिवर्ष पाँच लाख लोग को रोज़गार देने की घोषणा कर चुके हैं। उनके शासनकाल के अधिकतर वर्ष निकल चुके; किन्तु किसी भी वर्ष पाँच लाख लोग नियोजित नहीं हो पाये, क्यों? उनकी सरकार की अब तक की भी कार्यावधि जोड़ ली जाये तो भी पाँच लाख लोग रोज़गार प्राप्त नहीं कर सके हैं।
उत्तरप्रदेश में विभिन्न सेवाक्षेत्रों में बहुत बड़ी संख्या में स्थान रिक्त हैं; लाखों की संख्या में लोग बेरोज़गार हैं। ऐसे में, उत्तरप्रदेश के बेरोज़गार युवा-वर्ग के भविष्य को सुरक्षित करनेवाली नौकरी कहाँ से लायी जायेगी? निस्सन्देह, आज की परिवेश, परिप्रेक्ष्य तथा परिस्थिति में इसे यक्ष प्रश्न कहा जा सकता है।
फॉर्म भरना, पुस्तकें ख़रीदना, कोचिंग और अन्य शुल्कादिक की व्यवस्था करते-करते राज्य के विद्यार्थी तंग आ चुके हैं; क्योंकि शासकीय तन्त्र के तंग नज़रिया के कारण आरक्षण का आतंक, प्रोन्नति में आरक्षण का एकपक्षीय दृष्टिकोण, बेईमान और निरंकुश सत्तानीति के कारण युवावर्ग का घायल होता मन, जातीय राजनीति, प्रौढ़ता की ओर सरकती अवस्था, घर-परिवार के दायित्व-भार का निर्वहन आदिक स्थितियाँ एक ऐसी परिस्थिति को जन्म देती हैं, जहाँ राज्य का युवावर्ग अपने को विषम स्थिति में पा रहा है; अवसाद की ओर बढ़ रहा है; उसे ऐसी कोई दिशा नहीं दिख पा रही है, जिधर से आशा की किरण आ रही हो; दूसरी ओर, उसका अपराधीकरण भी हो रहा है।
आज उत्तरप्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, न्यायालय आदिक क्षेत्रों में लाखों की रिक्तियाँ पहले से ही पड़ी हुई हैं। ऐसे में, मुख्यमन्त्री की यह घोषणा आत्मघाती सिद्ध होने की स्थिति में दिख रही है।
आज जो निर्धारित अर्हता-प्राप्त युवावर्ग नौकरी की बाट जोह रहा है, सर्वप्रथम उसे नियोजित किया जायेगा तो युवा-असन्तोष और आक्रोश में कुछ कमी आ सकती है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ अगस्त, २०२१ ईसवी।)