शिक्षिका से 20 हजार की रिश्वत न मिलने पर की बदसलूकी, दफ्तर से भगाया

अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भले ही लाख प्रयास कर लें किंतु उन की करतूतें लाख कोशिशों के बावजूद भी छुप नहीं पा रही है।
ताजा मामला आज बेसिक शिक्षक कार्यालय का है, जहां पर एक शिक्षिका से काम के बदले रिश्वत मांगी गई, जब उसने मना कर दिया तो उसके साथ सरेआम बदसलूकी हुई। यही नही उसे धक्का मारकर गिरा दिया गया।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सांडी की अंशकालिक शिक्षिका वंदना ने द टेलीकास्ट को बताया कि 01 माह पूर्व उसके साल भर के बच्चे ही तबियत खराब हो गयी थी, जिससे उसने आकस्मिक अवकाश ले लिया था। इसकी सूचना उसने वार्डेन के अलावा बीएसए को डांक द्वारा प्रेषित की थी। बच्चे का स्वास्थ्य ठीक होने में 01माह लग गया जिसके बाद वह अपना स्कूल जॉइन करने के लिए आज बीएसए कार्यालय पहुंची।
शिक्षिका का आरोप है बीएसए ने उससे जॉइन कराने के एवज में 20 हजार रुपये देने को कहा। जब उसने पैसे न देने की बात कही तो वाद विवाद बढ़ गया। आरपो है कि बीएसए ने गाली गलौज करते हुए धक्का मारकर उसे दफ्तर से बाहर निकाल दिया। इस दौरान जमीन पर गिर जाने से शिक्षिका व उसके 01 वर्ष के बच्चे को मामूली चोटें आई हैं। ‘द टेलीकास्ट’ पीड़िता ने घटना से जिलाधिकारी को अवगत कराया। उसका कहना उस संविदा समाप्त करने की धमकी दी है। जमीन पर गिरने से उसके और उसके बच्चे को चोटें आई हैं और इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी कई लोग वहां मौजूद थे।
बीएसए के इस कृत्य से वह मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान है। अपने पति उपेंद्र के साथ मिलकर उसने जिलाधिकारी से बीएसए के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
विदित हो कि बेसिक शिक्षा विभाग पिछले कई सालों से अपनी भ्रष्ट कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहा है। वह चाहे हरदोई सिक्योरिटी गार्ड एजेंसी के गठजोड़ से संविदा कर्मियों के साथ की जा रही अवैध धन उगाही हो। या फिर सीसीएल व अन्य कार्यों के लिए शिक्षकों का शोषण। यह मामले मीडिया में उछलते ही विभाग के जिम्मेदार अपनी करतूतों को छुपाने में लग जाते हैं। किंतु लाख प्रयास के बावजूद भी उनके कारनामें बेपर्दा हो रहे हैं। बड़ा सवाल यह उठता है कि शासन और प्रशासन के लोग ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों की करतूतों को नजरअंदाज क्यों कर रहे है?


रिपोर्ट- हरिश्याम बाजपेयी