★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
हमने उत्तरप्रदेश-विधानसभा-चुनाव-परिणाम-प्रक्रिया का गहन अध्ययन करते हुए, यह तीव्रतापूर्वक अनुभव कर लिया है कि उत्तरप्रदेश का चुनाव ‘लोकतन्त्र बनाम ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ हो चुका है। यही कारण है कि कथित कम्पनी ने ‘भारत’ के सीने पर बलपूर्वक चढ़कर जबसे ‘न्यू इण्डिया’ का झण्डा गाड़ दिया है तबसे लोकतन्त्र ‘अवसर की तलाश’ मे रहा है। यदि निष्पक्षता से मतदान कराया जा रहा होगा और मतगणना सत्य-निष्ठापूर्वक कराया गया तो ‘समाजवादी पार्टी’ और उसकी घटक पार्टियाँ, यानी ‘महागठबन्धन’ “डंके की चोट पर” २५० से अधिक सीटें अर्जित कर लेगा। दूसरी ओर, दबा-कुचला-आहत किया गया लोकतन्त्र बलात्कारियों के चंगुल से मुक्त होकर ‘अपने होने’ का अनुभव करेगा।
‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ अपनी ‘प्लास्टिक सर्जरी’ वाली ‘नाक’ को बचाने के लिए हर स्तर पर, विशेषत: आपराधिक स्तर पर सभी प्रकार के कृत्य करके, चुनाव-परिणाम अपने पक्ष मे करने के लिए ‘कृत-संकल्प’ है। यही कारण है कि कथित कम्पनी के अधिकतर ‘कर्मचारी’ अपने-अपने विषैले बोल से जनसामान्य के मन मे ‘आतंक’ भरते आ रहे हैं। मंजू सिवाच, जो ख़ुद को मोदीनगर की प्रत्याशी बताती है, वह हिन्दू-मुसलमान के बीच दंगा फैलाने की बात किसी ‘आदेश’ नामक अपने कार्यकर्त्ता से कर रही है। इतना ही नहींं, मंजू सिवाच ब्राह्मण-क्षत्रियों को ‘बी० जे० पी० का चमार’ बता रही है। इस आशय का वीडियो हमारे पास सुरक्षित है। यह वीडियो कितना सही है और कितना ग़लत है, इसका परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविकता देश के सम्मुख आ सके।
उत्तरप्रदेश-चुनाव मे जो सर्वाधिक सन्दिग्ध भूमिका दिख रही है, वह मुख्य चुनाव-अधिकारी की है; क्योंकि इस चुनाव मे ऐसी-ऐसी घटनाओं की शिकायतें की जा रही हैं और जिन्हें घटते हुए दिखाया जा रहा है, जिनके आधार पर निस्सन्देह, कहा जा सकता है कि सत्तारूढ़ दल हर स्तर पर असंवैधानिक कृत्य करके-करवाके यह चुनाव-परिणाम अपने पक्ष मे कराना चाहता है। कई मतदान-केन्द्रों पर मतदाताओं के द्वारा ‘कमल के फूल’ के विरुद्ध किसी अन्य दल के चुनाव-चिह्न के सामने का बटन दबाने पर बत्ती ‘कमल के फूल’ के सामने की जलने लगती है, जिसे मतदाता ‘रिटर्निंग’ और ‘पोलिंग’ अधिकारियों को दिखा भी रहे हैं; किन्तु कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहा है। यह भी समझा जा सकता कि ‘कमल के फूल’ के प्रति उन अधिकारियों का मोह हो या फिर जान बचाकर घर लौटने की चिन्ता हो। इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी के चुनाव-चिह्न ‘साइकिल’ को ‘ई० ह्वी० एम०’ से निकालकर ग़ायब कर देने और उस निशान को मशीन से उखाड़कर लटका देने की भी घटना देखी गयी है। यह गम्भीर विषय यहीं तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या मे ‘ई० ह्वी० एम०’ की घण्टों तक ख़राबी की सूचना दी जा रही है; पुलिस-अधिकारी और ज़िला-प्रशासन के प्रभावकारी सरकारी ग़ुलाम अधिकारी वहाँ के मतदाताओं, विशेषत: मुस्लिम महिला-पुरुष मतदाताओं को अनेक मतदान-केन्द्रों से भगाकर ‘वर्दीवाले गुण्डे’ का चरित्र-चित्रण करते हुए, अपनी कर्त्तव्यनिष्ठा का बाख़ूबी परिचय प्रस्तुत करते आ रहे हैं; बिना किसी भय के भारतीय जनता पार्टी’ के झण्डे लगाये जा रहे हैं; भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सुरक्षाकर्मियों को अपमानित करते हुए, वहाँ पहुँच आ रहे हैं, जहाँ मतदाता अपने मत का प्रयोग कर रहे होते हैं; वहीं ज़बरदस्ती करके अपने पक्ष मे मतदान कराते आ रहे हैं। ऐसे मे, प्रमुख चुनाव-अधिकारी की कार्यप्रणाली-पद्धति को लेकर जितना भी धिक्कारा जाये, कम है।
बेशक, चुनाव आयोग के सभी अधिकारी बेईमान हैं; क्योंकि उनमे से एक भी ऐसा नहीं है, जो काररवाई करे। उत्तरप्रदेश के अधिकांश मे खुले आम गुण्डई की जा रही है; चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग के सभी अधिकारियों के निठल्लेपन और सत्तारूढ़ दल के पक्षधर होने के विषय का उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को स्वत: संज्ञान करना चाहिए। इस चुनाव मे अधिकतर एस० डी० एम०, डी० एम०, कमीश्नर, एस० पी०, एस० एस० पी० आदिक अधिकारी खुले रूप से सत्तारूढ़ दल के पक्षधर बने हुए हैं।
पश्चिम उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर मे भारतीय जनता पार्टी के गुण्डों ने समाजवादी पार्टी के एक बूथ एजेण्ट सुधीर सिंह यादव को भारतीय जनता पार्टी के लगभग ५० कार्यकर्त्ताओं ने उस समय घेरकर गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब वह पोलिंग बूथ से अपने घर के लिए लौट रहा था। उस मृतक का दोष यही था कि अवैध रूप से मतदान करने के लिए जा रहे कुछ व्यक्तियों को रोक लिया था। उस प्राणघातक हमले मे कई लोग घायल हैं, जिसमे भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्त्ता भी शामिल था, जिसके सीने मे गोली लगी थी। इस घटना के बाद भी ‘निर्वाचन आयोग के अधिकारी मौन बने हुए हैं।
पश्चिमी उत्तरप्रदेश मे मतदान किये जा रहे थे और कई समाचार-चैनलों के माध्यम से योगी आदित्यनाथ के साथ की गयी भेंटवार्त्ता दिखायी जा रही थी, जो कि आचार संहिता के विरुद्ध कृत्य है। “मैं गर्मी निकाल दूँगा”-जैसे आतंकी बोल बोलकर ख़ुद को योगी कहनेवाले कथित ‘योगी आदित्यनाथ’ ने अपने विरोधियों को उत्तर-प्रत्युत्तर देने के लिए बाध्य कर दिया है। हमे लगता है, ‘भारतीय दण्ड संहिता’ मे ‘उकसाने’ का विषय अत्यन्त घातक अपराध है, इसका संज्ञान योगी को नहीं होगा, ऐसा नहीं हो सकता। दूसरा दृश्य उभरता है, जब स्वयं मुख्यमन्त्री रहते हुए, आदित्यनाथ ने स्वयं पर लगाये गये और सिद्ध किये गये बीसों अपराधों को ‘स्वयम्भू न्यायाधीश’ के रूप मे हटा लिया था।
कुल मिलाकर, निर्वाचन अधिकारी, ज़िला-प्रशासन तथा पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से प्रश्नो के घेरे मे आ चुके हैं। इन सभी के विरुद्ध भी काररवाई की जानी चाहिए; पर प्रश्न है, ‘”बिल्ली के गले मे घण्टी बाँधे कौन”?
‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ उत्तरप्रदेश का चुनाव-परिणाम अपने पक्ष मे करने के लिए ‘हिन्दू-मुसलमान’, ‘हिज़ाब’, ‘राममन्दिर’, ‘आतंकवाद’ जैसे सड़े-गले विषय को उभारती आ रही है। परिवारवाद, हिन्दू-मुसलमान, जिन्ना, पाकिस्तान, हिन्दू-मुसलमान पर वह मुह की खा चुकी है, इसीलिए वह कई समीकरणों के जाल बुनने मे लगी हुई है। वह अपने प्रबलतम विपक्षी दल के पक्ष मे ‘अपार जनसमर्थन’ को देखकर और चुनाव-परिणाम स्वयं से बहुत दूर होता भाँपकर ‘सन्न’ है। इसका प्रभाव हमे नरेन्द्र मोदी, योगी आदित्यनाथ योगी, अमित शाह, जे० पी० नड्डा आदिक की भरभराई और खिसियाई बोली सुनकर समझा जा सकता है। ऐसा लगता है, ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ दिवालिया होने के कगार पर है। वैसे भी इस कम्पनी के कारनामो से देश की जनता त्रस्त हो चुकी है।
समाजवादी पार्टी के पक्ष मे जिस तरह से समूह मे मतदान किया जा रहा है, उससे भय खाकर ऐसा भी लगता है कि उत्तरप्रदेश के चुनाव-परिणाम मे ‘समाजवादी पार्टी’ को पहले, भा० ज० पा० को दूसरे तथा ‘समाजवादी पार्टी’ को तीसरे स्थान पर दिखा दिया जाये, ताकि ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ पर सीधे आरोप न लग सके और कथित ‘कुमारी बहन जी’ ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ के साथ हो लें। वैसी स्थिति मे ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ‘कुमारी मायावती’ को उत्तरप्रदेश का आगामी राज्यपाल या फिर किसी ऊँचे पद पर आसीन करा दिया जाये। वैसा करना कथित ‘कुमारी’ की बाध्यता और विवशता है। इसे समझने के लिए हमे १२ अप्रैल, २०१८ ई० की उस घटना पर से पर्दा उठाना होगा, जिसे बेहद घृणित राजनैतिक स्वार्थ-सिद्धि के कारण ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ने अपनी ज़बान सिल रखी है। उत्तरप्रदेश की तत्कालीन मुख्यमन्त्री कुमारी मायावती ने उत्तरप्रदेश के चीनी निगम की १० सक्रिय और ११ निष्क्रिय चीनी-मिलों को वर्ष २०१०-११ मे ‘औने-पौने’ दाम मे बेचकर ११ सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया था। उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने तब ‘बदले की काररवाई’ करते हुए, १२ अप्रैल, २०१८ ई० को घोटालों की जाँच सी० बी० आइ० से कराने की सिफ़ारिश की थी; परन्तु आगे चलकर ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ने कुमारी मायावती का ‘इस्तेमाल’ करना शुरू कर दिया था, जो जारी है। यही कारण है कि उक्त कम्पनी ने अपनी ‘अवसरवादी फ़ाइल’ मे ‘मायावती’ की कर्मकुण्डली ‘आरक्षित खिलाड़ी’ की तरह से रख ली है। यही कारण है कि बहन जी चुनाव-प्रचार करते यदा-कदा दिख रही हैं और मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ पर शिकायत की फुहारें छोड़ देती हैं और बौछारें करतीं अखिलेश यादव की ओर दिखती हैं।
यह भी सम्भव है, मतगणना करते समय आरम्भ मे ‘समाजवादी पार्टी’ की बढ़त दिखायी जाये और बहुत बाद मे ऐन मौक़े पर ‘भारतीय जनता पार्टी’ की धीरे-धीरे बढ़ोतरी (‘बढ़ोत्तरी’ अशुद्ध है।) दिखाकर बहुमत या फिर बहुमत से कुछ कम सीटें दिखाकर ‘कुमारी बहन मायावती’ के साथ ‘गठबन्धन’ कर, पुन: उत्तरप्रदेश पर ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ सरकार गठित करने का रास्ता निकाल लिया जाये। वैसे पूरी तरह से ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ बेईमानी पर जब उतारू हो जायेगी तब अपनी सीटें २५० के आस-पास दिखा देगी, जिससे उसकी ३००-३५०-४०० सीट पाने की बात झूठी निकल आये और उसकी सरकार भी बन जाये।
सच तो यह है इन सभी समीकरणों पर तुषारपात होने की सम्भावना बलवती दिखती है, फिर भी मतगणना के दिन की प्रतीक्षा सहना तो बनता ही है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ फ़रवरी, २०२२ ईसवी।)
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लेखक राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय विषय-विश्लेषक और भाषाविज्ञानी हैं।