दल बदल राजनीति में माहिर हैं नरेश अग्रवाल

            नरेश अग्रवाल के बारे में कहा जाता है कि वे राजनीति की हवा का रुख पहचानने में माहिर हैं। 1988-89 में जब यूपी में कांग्रेस कमजोर पड़ रही थी, तब नरेश अग्रवाल ने उसका साथ छोड़ दिया। 1989 में कांग्रेस छोड़ने के बाद नरेश अग्रवाल ने 1997 अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन किया और कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह सरकार में मंत्री भी बने ।
            1998 में मुलायम सिंह की सरकार में भी नरेश अग्रवाल मंत्री बने। हालांकि 2007 में बसपा की सरकार बनने के बाद वे सपा छोड़कर मायावती के संग हो लिए। नरेश अग्रवाल ने 2008 में बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन की। हालांकि बसपा के साथ उनकी दोस्ती तीन साल ही चल सकी। 2012 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। 2011 में सपा में शामिल होने वाले नरेश अग्रवाल उस समय भी राज्यसभा सांसद थे। उन्होंने बेटे नितिन अग्रवाल को टिकट न मिलने पर बसपा छोड़ी थी।
        1951 में यूपी के हरदोई जिले में जन्मे नरेश अग्रवाल ने लखनऊ यूनीवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन और लॉ की डिग्री ली। वे हरदोई से सात बार विधायक भी रहे। हरदोई सदर से उनके बेटे नितिन अग्रवाल तीन बार से विधायक हैं। कहा जाता है कि हरदोई की आठ विधानसभा क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ है। नरेश अग्रवाल के बारे में यह भी कहा जाता है कि 1980 के बाद से प्रदेश की कोई भी सरकार रही हो वे उसके साथ जरुर हो जाते हैं। उनके राजनैतिक सफ़र को देखें तो यह सही भी मालूम पड़ती है।

नरेश अग्रवाल का सियासी सफरनामा


              उन्होंने निर्दलीय के तौर पर शुरुआत की थी लेकिन फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। साल 1989 में निर्दलीय विधायक बने थे।साल 1991 में कांग्रेस टे टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद साल 1993 व साल 1996 में भी वह कांग्रेस की ओर से विधायक बने। साल 2002 में सपा के टिकट पर विधायक बने।
         कांग्रेस की ओर से तीन बार हरदोई से विधायक रहने के बाद उन्होंने सपा का हाथ थामा। 1997 से 2001 तक ऊर्जा मंत्री रहे,2003 व 2004 तक पर्यटन मंत्री,2004 से 2007 तक परिवहन मंत्री रहे। साल 2008 में वह बसपा में शामिल हो गए तब लोक लेख समिति के अध्यक्ष रहे। पिछले विधान सभा चुनाव से पहले वह सपा में फिर से वापस आ गए थे।समाजवादी पार्टी में आने से पहले नरेश अग्रवाल बीएसपी कोटे से राज्यसभा पहुंचे थे, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था। नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल भी सपा में शामिल हो हए। उन्हें अखिलेश सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन बनाया गया था जो सदर सीट से विधायक है।