आदित्य त्रिपाठी (सहायक अध्यापक/प्रबन्ध सम्पादक आईवी24)
- जीसीटीएम और ग्लोबल आयुष समिट में एक लाख किलाेग्राम से अधिक कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन से बचा गया
- आयुष मंत्रालय ने सतत विकास और वैश्विक स्वास्थ्य का दिया संदेश
- आयुष मंत्रालय की ओर से गुजरात में हुआ था डब्ल्यूएचओ जीसीटीएम भूमि पूजन समारोह और तीन दिवसीय ग्लोबल समिट
- समारोह में लगभग एक लाख प्लास्टिक बोतल, 15000 टैग और 50 हजार कटलरी के उपयोग से बचा गया
27 अप्रैल 2022, नई दिल्ली: प्लास्टिक से बने उत्पाद पर्यावरण में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। ऐसे में इस जहर को रोकने के लिए विश्व भर के संगठन और सरकारें सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने और पर्यावरण संरक्षण के तहत जागरूकता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही हैं। इसी की मिशाल पेश करते हुए आयुष मंत्रालय की ओर से गुजरात में हुए डब्लयूएचओ-जीसीटीएम के भूमि पूजन समारोह और तीन दिवसीय ग्लोबल समिट में प्लास्टिक से बने उत्पाद का उपयोग नहीं किया गया। इसकी जगह इको फ्रेंडली उत्पादों का इस्तेमाल किया गया। इससे करीब एक लाख से अधिक प्लास्टिक की बोतलों, 15000 प्लास्टिक टैग और 50 हजार प्लास्टिक कटलरी के उपयोग से बचा गया। ऐसे में भव्य आयोजन से निकलने वाले करीब 119437.5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (Co2e) से बचा गया। दोनों समारोह में 27 हजार से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया।
धरती माता के स्वास्थ्य को बिगाड़ने की प्रमुख वजह सिंगल यूज प्लास्टिक–
गुजरात में हुए वैश्विक स्तर के समारोह में सिंगल प्लास्टिक पर अंकुश लगाते हुए आयुष मंत्रालय ने विश्व भर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाई। इससे न केवल समारोह में आए नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया बल्कि इस कदम की चारो ओर प्रशंसा भी जमकर हुई। समारोह में सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी पानी की बोतलें, प्लेट, कप, नेक आदि का उपयोग नहीं किया गया। दुनिया भर के देश, संगठन और संस्थाएं सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने के लिए एक साथ आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) के पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी -14) के सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “एक बार उपयोग होने वाला प्लास्टिक न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि यह धरती माता के स्वास्थ्य को बिगाड़ने की एक प्रमुख वजह है।
प्रदर्शनी से भी दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश—
गुजरात के जामनगर और गांधीनगर में हुए अलग-अलग समारोहों में पर्यावरण को लेकर प्रधानमंत्री के विचारों को आयुष मंत्रालय ने आत्मसात करते हुए प्रतिभागियों को पानी के लिए तांबे की बोतलें वितरित कीं। समारोह स्थल पर किसी को पानी की समस्या न हो इसके लिए जगह-जगह पानी के डिस्पेंसर लगाए गए। समाराेह के आयोजकों ने बताया कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के उद्देश्य से प्लास्टिक फ्लेक्स बैनर और ऐसी अन्य सामग्री के उपयोग नहीं किया गया।
कार्यक्रम में पर्यावरण से संबंधित मुद्दों और समाधानों पर रचनात्मक प्रदर्शनियां भी दिखाई गईं। ‘स्मार्ट एंड सस्टेनेबल आयुष फैक्ट्रीज़ फॉर द फ्यूचर’ पर प्रदर्शनी ने स्वच्छ, हरे और टिकाऊ भविष्य के लिए कुशल अपशिष्ट निस्तारण की दिशा में कदम उठाए और प्लास्टिक के बिना जीने का तरीका भी दिखाया। प्रदर्शनी और पर्यावरण संबंधों पर बात करते हुए द इको फैक्ट्री फाउंडेशन के संस्थापक आनंद चोरडिया ने कहा, “प्रदर्शनी पर्यावरण से संबंधित समस्याओं और समाधानों के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है, जिसमें विभिन्न अपशिष्ट ऑडिटिंग और पृथक्करण प्रक्रियाएं और उनके प्रभावी प्रबंधन, धूसर जल प्रबंधन और संभावित पुनर्चक्रण, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत का उपयोग, बंजर खाली भूमि को जैव विविधता पार्कों में परिवर्तित करना, देशी वनस्पतियों और जीवों को बनाए रखना या फिर से हासिल करना, हरित भवन की अवधारणा को दर्शाया गया है।
पर्यावरणविद् डॉ. प्रतीक मेहता के अनुसार, हाल ही में हुए परीक्षण में मानव रक्त के 80% नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा पायी गई, जो चिंता का बड़ा विषय है। उन्होंने प्लास्टिक के बिना जीने और इसे जीवन में आत्मसात करने पर जोर दिया।