— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आप में से प्रायः किसी-न-किसी की शिकायत बनी रहती है कि आपके सम्प्रेषण को बहुत कम लोग ‘पसन्द’ करते हैं। ऐसे में, मेरी ओर से एक प्रश्न करना स्वाभाविक है :– आप ‘पसन्द’ कराने के लिए अभिव्यक्ति करते हैं अथवा अपनी वैचारिकता अथवा काव्यधर्मिता अथवा किसी भी प्रकार की स्वस्थ शब्दधर्मिता का परिचय प्रस्तुत करने के लिए?
यह सत्य है कि आपकी सामर्थ्य और अनुभवसम्पन्नता का परीक्षण करने में ‘फेसबुक’ के बहुसंख्यक मठाधीश पूर्णतः अक्षम हैं; क्योंकि उनका ही सम्प्रेषण जिस दिशा में जा रहा होता है, वे उससे ही अनभिज्ञ रहते हैं।
आप यदि अपने लेखन के माध्यम से किसी सकारात्मक प्रभाव को पैदा करने में दक्ष और निष्णात हैं तो परमुखापेक्षिता क्यों?
समय की धार पर ‘समय-सत्य’ चलने का अभ्यास कीजिए; समय आपका मूल्यांकन करेगा और जिन्हें भी आप चाटुकार के रूप में देखते-पाते हैं, वे सभी एक किनारे खड़े रहकर, आपके महिमा-मण्डन को फूटती आँखों से देखते ही रह जायेंगे।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ अक्तूबर, २०२० ईसवी)