कछौना (हरदोई): शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण एक नेत्रहीन युवक प्रधानमंत्री आवास व शौचालय के लिए खंड विकास अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी, जिलाधिकारी, क्षेत्रीय विधायक, सांसद डॉक्टर अंजू बाला की चौखट के महीनों से चक्कर लगा रहा है। परंतु उसको कहीं से भी राहत नहीं मिली है। एक बार योगी सरकार में मंत्री सत्यदेव पचौरी ने इसी मामले में शौचालय के लिए जिलाधिकारी हरदोई को निर्देशित भी किया था लेकिन छोटेलाल की झोली खाली ही रही । हारकर पर उसने जनसुनवाई के माध्यम से शिकायत कर ब्लॉक मुख्यालय पर भूख हड़ताल की बात कही है।
बताते चलें कि विकासखंड कछौना की ग्रामसभा कलौली के ग्राम हरिचंदापुर में नेत्रहीन दिव्यांग छोटेलाल अपनी विधवा मां के साथ कच्चे मकान में रहता है। विधवा मां ने अपने नेत्रहीन बच्चे को गांव के परिषदीय स्कूल में किसी तरह से कक्षा आठ तक की शिक्षा दिलायी । लेकिन आगे की पढ़ाई आर्थिक तंगी व जानकारी के अभाव में नहीं करा पायी। आगे की पढ़ाई न करने के कारण छोटे लाल का भविष्य अंधकार में डूब गया। जीवन की मुख्यधारा में आने के सभी रास्ते बंद हो गए। उसको मनरेगा योजना भी कोई रोजगार नहीं दे सकी। उसके व माँ के भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गई। अन्य भाई जीविकोपार्जन के लिए दूसरे शहर पलायन कर गए। दिव्यांग छोटे लाल के लिए स्वयं व विधवा मां के भरण पोषण की व्यवस्था करना एक बहुत बड़ी समस्या बन गई।
छोटेलाल ने रोजगार के लिए योजनाओं की जानकारी ब्लॉक मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक की। परंतु सरकार की कोई भी योजना उसको रोजगार नहीं दिला सकी। मनरेगा जॉब कार्ड के कागज संबंधित अधिकारी को दिए। वह भी ग्राम प्रधान की रुचि न लेने के कारण कूड़े के ढेर में फेंक दिए गए। छोटेलाल कच्चे मकान यानी झोपड़पट्टी में गुजर बसर कर रहा है। आर्थिक जनगणना की सूची में नाम न होने के कारण उसको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। वंचित परिवारों की सूची अभी तक ब्लॉक कर्मी तैयार नहीं कर पाए हैं या कहें गुपचुप तरीके से चहेते लोगों को सूची में शामिल करके तैयार कर ली है। पारदर्शिता के अभाव में शायद वह इस सूची से भी वंचित हो गया है। 
सरकार के नुमाइंदे भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात चुनावी जन सभाओं में जोर-शोर से कहते हैं। स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है। लेकिन खुले में शौच न जाने का संदेश बुलंद करने वाली सरकार को यह गरीब दिव्यांग व विधवा परिवार नजर नहीं आया। जिसके चलते नेत्रहीन छोटे लाल व वृद्ध माँ खुले में शौच जाने को विवश हैं, जिससे उनको गड्ढे में गिरने व कीड़े काटने का खतरा हमेशा बना रहता है। छोटेलाल दिव्यांग ने रोजगार, आवास व शौचालय की मांग हेतु सैकड़ों बार शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई। लेकिन बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने की बातें पूरी कल्पना से ज्यादा नहीं है।
संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से बात करने पर उसे आश्वासन की घुट्टी के अलावा कुछ भी नहीं मिला। जिससे निराश होकर दिव्यांग नेत्रहीन छोटेलाल चार जुलाई से ब्लॉक मुख्यालय पर अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठने का मन बना लिया है। जिसकी सूचना जिलाधिकारी को ईमेल के माध्यम से भेज दी है।