सर्जनपीठ का आयोजन : ‘बच्चों का, बच्चों के लिए, बच्चों के द्वारा’

डॉ० चित्रांशी की कविताओं में झाँकता बालमन : महेन्द्र सिंह

‘बालसंसार’ शब्द सामने आते ही इलाहाबाद नगर की उस गरिमा की प्रतिष्ठा होती है, जिसे समाज के शिक्षित जन में से अधिकतर इस विलक्षण सत्य से अनभिज्ञ हैं कि सम्पूर्ण विश्व में इलाहाबाद एकमात्र ऐसा नगर है, जहाँ से बच्चों के लिए सर्वाधिक पत्र-पत्रिकाएँ और पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इतना ही नहीं, सर्वाधिक बाल-साहित्यकार इलाहाबाद में ही रहे हैं। वह चाहें आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, प्रेमचन्द, देवेन्द्रदत्त तिवारी आदिक रहे हों, शकुन्तला सिरोठिया श्रीनाथ सिंह आदिक रहे हों, सभी ने बालमनोविज्ञान को समझते हुए बच्चों के लिए उपयोगी रचनाएँ की थीं। उसी सन्दर्भ में हमें डॉ० प्रदीप चित्रांशी की बाल-रचनाएँ आश्वस्त करती हैं।
आज (४ फरवरी, २०१८ ई०) इलाहाबाद बौद्धिक, शैक्षिक, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक मंच ‘सर्जनपीठ’ की ओर से ‘चिल्ड्रेन नेशनल इंस्टिट्यूट’, स्वराज भवन के सभागार में आयोजित ‘बच्चों का, बच्चों के लिए, बच्चों के द्वारा’ के अन्तर्गत डॉ० प्रदीप चित्रांशु के बालगीत-संग्रह ‘काँव-काँव करता है कौआ’ के लोकार्पण-उत्सव में ये सारे तथ्य उभर कर सामने आये हैं। ‘चिल्ड्रेन नेशनल इंस्टिट्यूट’ की बालिकाओं : स्वाति, शगुन, ख़ुशी, लक्ष्मी तथा सोनम ने बालकृति का लोकार्पण किया था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व-अध्यक्ष प्रो० कृष्णगोपाल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस सारस्वत समारोह में मुख्य अतिथि और उपशिक्षानिदेशक, माध्यमिक श्री महेन्द्र सिंह ने कहा, “बच्चों में जिज्ञाषा होती है। यदि जिज्ञासा न हो तो जीवन ही समाप्त हो जाता है। यही कारण है कि डॉ० चित्रांशी की कविताओं में बालमन झाँकता नज़र आ रहा है।”
समारोह के संयोजक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा, “बच्चों के बीच बच्चों का साहित्य जिस रूप में अनावृत्त हो रहा है, यह हम सभी के लिए गौरव का विषय है। इसका श्रेय उन डॉ० प्रदीप चित्रांशी को जाता है, जिन्होंने बालसुलभ कविताओं का प्रणयन कर, अपने सम्यक् बाल-मनोविज्ञान का परिचय दिया है।”
बालभवन के निदेशक डॉ० ख़ालिद अंसारी का मत था “डॉ० चित्रांशी का बालगीत एक सन्देश है, प्रेरणा है। हमने जिस तरह की बालकविताएँ स्कूलों में पढ़ी थीं, उसी तरह की ये कविताएँ हैं।”
इससे पूर्व रसराज पाण्डेय ने वेदपाठ किया। ‘चिल्ड्रेन नेशनल इंस्टिट्यूट’ के बच्चों ने समवेत स्वर में सरस्वती-प्रार्थना और ईशवन्दना की। इस बालिका संस्थान के संरक्षक कर्नल राजकुमार काक ने डॉ० चित्रांशी के बालगीतों को सहज-सरस-सरल बताया। पलक, काजल, प्रिया, अंशिका, सान्या, अनन्या, पायल, आरती, परी, स्वाति, शगुन, ख़ुशी, लक्ष्मी, राशि, सोनम, रिंकी तथा कुमकुम ने डॉ० प्रदीप चित्रांशी की कविताओं के वास्तविक मंचन किये।
इस अवसर पर सर्वश्री अंजनी कुमार सिंह ने कहा, ” यह कृति अन्त:करण से रची गयी है।” इनके अतिरिक्त धर्मेन्द्र तिवारी, मुनेन्द्र श्रीवास्तव, नन्दल हितैषी, देवेन्द्र श्रीवास्तव ‘देवेश’ आदि ने विचार व्यक्त किये। राष्ट्रगान से समारोह सम्पन्न हुआ था। इस अवसर पर ज्योति चित्रांशी, रणविजय निषाद, जगन्नाथ शुक्ल, रविरंजन पाण्डेय, साकेत तिवारी, डॉ० अरविन्द मिश्र, स्मिता, ज्योतिर्मयी, तलब जौनपुरी, देवयानी, हरिशंकर तिवारी, उर्वशी उपाध्याय, नाज़िम इलाहाबादी, कैलाश पाण्डेय, सरोज, केशव प्रसाद सक्सेना, जयशंकर मिश्र, असलम आदिल इलाहाबादी, आलोक शुक्ल, कुटेश्वरनाथ त्रिपाठी, विवेक सत्यांशु, अजीत कुमार पाण्डेय, अशोक स्नेही, आचार्य कृष्णगोपाल श्रीवास्तव आदि साहित्यानुरागीगण उपस्थित थे।
डॉ० रवि मिश्र ने समारोह का संचालन किया और डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कृतज्ञता-ज्ञापन किया।