डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-
हे महाप्रभो!
जैसे आपने विकलांग के लिए ‘दिव्यांग’ शब्द गढ़ दिया है वैसे ही नेताओं के लिए उनके आचरण के अनुरूप एक और शब्द की संरचना कर दो क्योंकि ‘नेता’ शब्द का बार-बार अपमान होता आ रहा है। हम राष्ट्रवादी भारतीय नागरिक आपके वर्तमान नेताओं के चंगुल में बुरी तरह से फँसते जा रहे हैं, जिसका नेतृत्व आप ‘कल, बल, छल’ के साथ करते आ रहे हैं। यही कारण है कि आप मर्यादाविहीन रहकर, अपने ‘नेता’ नामक योद्धाओं की कुबुद्धि को जगाते रहते हो। सबसे पहले अपनी दुर्बुद्धि को सद्बुद्धि में बदलो, नहीं तो जनता-जनार्दन को अपने मूल चरित्र से हटकर कुछ अलग करने के लिए सोचना पड़ेगा फिर तुम्हारे चक्रव्यूह का बेधन करने के लिए एक नहीं, कई अभिमन्यु उठ खड़े होंगे और वे सबकुछ छिन्न-भिन्न कर, अपनी राष्ट्रधर्मिता का गरिमापूर्ण परिचय देंगे।