और तुम

ज़ैतून ज़िया

मेरे पास ऐसी कई कहानियाँ हैँ
जिन्हें लिखूं
तो कई बुर्राख कुर्ते
दागदार हो जाएं
शराफत की,दो पल्ली
कई टोपियाँ
और ऊंची पगड़ियां
नीचे गिर जायें
सदियों से गढ़ी गई
इज़्ज़त कि मीनारें
ज़मीनदोज़ हों

और तुम
जो, मुझसे नज़र मिलाते हो
तो ना मिलाओ
उन घिनौनी तस्वीरों में
आपने ही अक्स को देख कर
आपने आदम होने पे
शर्मासार हो जाओगे
क्यूंकि मेरी कलम की तरह
मेरी आंखें भी
झूठ नहीं कह पाती !!

और तुम
जो, मुझसे प्यार जताते हो
तो ना जताओ
इन गहरे ज़ख्मो में
आपने ही नाखूनों को देख कर
आपने आदम होने पर
हैरान हो जाओगे
क्यूंकि मेरी कलम की तरह
मेरी आहें भी
झूठ नहीं कह पाती !!

और तुम
जो, मुझको हमदर्दी दिखाते हो
तो ना दिखाओ
इन छले हुए वादों में
आपने ही लफ़्ज़ों को सुन कर
परेशान हो जाओगे
क्यूंकि मेरी कलम की तरह
मेरी सांसें भी
झूठ नहीं कह पाती !!