आरती जायसवाल (साहित्यकार, समीक्षक) :

कृष्ण-कृष्ण ,करते-करते कितने भवसागर पार हुए।
धर्म की रक्षा करने को
प्रभु के सारे ‘अवतार’ हुए।
जब-जब धरती पर बढ़ा
दुष्टों का पापाचार,
तब-तब मानव बनके आये प्रभु करने संहार।
अमर प्रेम का गीत है,
राधेकृष्ण का प्रेम अपार।
प्रेम बिना कुछ भी नहीं,
सूना है संसार।
भक्त और भगवान का
अद्भुत है सम्बन्ध,
पूर्ण समर्पण भाव से हैं
सारे अनुबन्ध।
‘मानव’ है इस सृष्टि का एक अनुपम उपहार,
कृपा करो प्रभु सब पर सदैव
सबका हो उपकार।