जयति जैन “नूतन” –

नहीं साब जी
दोषी मैं हूँ
मैंने खुद का बलात्कार किया है
कपड़े उतारे खुदके मैंने
खुद को नोंच लिया है।
खुद को दोषी कह ना पाऊं
इसलिए नाम दूसरे का लिया है
न्याय की गुहार लगाई मैंने
अपनों को खो दिया है
सबकुछ लूटा जिसने मेरा
हंसता वो फिरता है
इल्जाम खुदी पर ले लूं क्या?
मैंने खुद का बलात्कार किया है।
सब अपने दूर हुए हैं मुझसे
अब किससे मैं घबराऊँ
एक राज की बात तुम्हें अब
सोच रही हूँ बतलाऊँ
कुछ नहीं बचा मेरे पास
जिसको लेकर मैं चिल्लाऊं
पिता, चाचा, मौसी, चाची
किन किनके नाम गिनाऊँ?
लुट गयी है दुनिया मेरी
अब मैं किसी ने ना घबराऊँ
न्याय नहीं दे सकते तुम तो
कहो इल्जाम खुद पर लगाऊं
मेरे चुप रहने से सच्चाई नहीं दबेगी
खुद पर इल्जाम लेने से भी बात नहीं बनेगी
मुझे लड़ना है उस बहशी से
जिसके किस्से कैसे मैं सुनाऊँ
अंधे बने बैठे कानून व सत्ताधारी
अब कहो तो इल्जाम खुद पर लगाऊं।
— जयति जैन “नूतन” —- 30/07/2019