तुम आ रहे हो
इस ख़ुशी में कई काम अधूरे हैं
जिसे समेटना हैं
अपने आँगन को बुहारना है
गोबर से लीपकर तुलसी की चौरा पर
दीपक जलाना हैं
सूखे पत्तों को हटाकर ,
घर आँगन सजाना हैं
ये सब तुम्हारे आने की ख़ुशी से
अदहन पर मीठा भात पकाना है।
आकांक्षा मिश्रा, गोण्डा