दिल्ली- सहोदय पब्लिक स्कूल वातानुकूलित चर्च सभागार हौज खास नई दिल्ली में रविवार को साहित्य संगम संस्थान दिल्ली इकाई के द्वारा एक अनूठा साक्षात्कार आयोजन एवं काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया गया।
संस्थान के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजेश पुरोहित को कुमार रोहित राज ने बताया कि इस आयोजन में ऐसे वरिष्ठ साहित्यकार रचनाकारों की साहित्यिक यात्रा का साक्षात्कार लिया जा रहा है जो कभी सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहे।
इस पुनीत आयोजन की पहली कड़ी में वरिष्ठ साहित्यकारा आ. निर्मला मुक्ता टोप्पो जी का साक्षात्कार लिया गया जो कि दिल्ली विकास प्राधिकरण से सेवानिवृत्त सहायक निदेशक हैं। साक्षात्कारकर्ता रहे प्रबुद्ध साहित्यकार साहित्य संगम संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष कुमार रोहित रोज। कुमार रोहित ने मुक्ता टोप्पो जी से उनके साहित्यिक सफ़र से संबंधित, संघर्ष व सुखद अनुभवों पर वार्ता व संवाद किए और अनेक प्रश्न पूछे। आदरणीया टोप्पो जी ने बेहद सौम्यता के साथ सभी प्रश्नों के सहज उत्तर दिए और समाज को संदेश देते हुए न जाने कितनी लेखनियों को अपने संघर्षमय जीवन से प्रेरित किया। साथ ही अपनी कुछ रचनाओं का पाठ भी बहुत सुंदर ढंग से किया।
इस पावन अवसर पर उनके साथ उनका पूरा परिवार सभागार में उपस्थित था जो अविस्मरणीय व गौरवान्वित करने वाला समय था सभी के लिए। मुक्ता टोप्पो जी को संगम के द्वारा साक्षात्कार से पूर्व अंगवस्त्र व बैज से सम्मानित किया गया तथा साक्षात्कार संपन्न होने के बाद ट्राॅफी व फ्रेम जड़े खूबसूरत अभिनंदन पत्र से सम्मानित किया गया। साक्षात्कार को साहित्य संगम साक्षात्कार मंच व कई अन्य इकाइयों में सीधा प्रसारण किया जिसे संगम की सारी इकाईयों व शालाओं में प्रमाणन अधिकारी संगीता मिश्रा जी ने पहुंचाने का श्लाघनीय कार्य किया।
साक्षात्कार के उपरांत बहुत ही शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता देश की जानी मानी शायरा डॉ. नेहा इलाहाबादी जी के द्वारा की गयी। मुख्य अतिथि के तौर पर मुक्ता टोप्पो जी व दिल्ली इकाई के परामर्शदाता डॉ अशोक कुमार ‘मयंक’ जी ने मंच की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन तथा दिल्ली इकाई उपाध्यक्ष सुधा बसोर जी की सरस्वती वंदना से किया गया। सभी गण्यमान्य अतिथियों को अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया।
काव्यगोष्ठी का कुशल संचालन दिल्ली इकाई अध्यक्षा कुसुम लता ‘कुसुम’जी के द्वारा किया गया जिसमें संचालिका ने संक्षिप्त संचालन करके आमंत्रित साहित्य मनीषियों को पढ़ने का अधिक समय देकर कार्यक्रम को विशिष्ट बनाया। कार्यक्रम में आमंत्रित स्वरों में उपस्थित रहे, कुसुम आचार्य जी, डॉ संगीता पाहुजा जी, सुधा बसोर जी, मुकेश सिंह जी, रचना निर्मल जी, तरुणा पुंडीर जी, इंदु मिश्रा किरण जी, श्यामा भारद्वाज जी, चंचल हरेंद्र वशिष्ठ जी, स्नेह लता स्नेह जी, नीना गुप्ता जी, व रजनी बाला जी। आगंतुक विद्वान अतिथियों में सुरेश चंद्र सेमवाल (प्रधानाचार्य) जी ने शुभकामनाएँ व वक्तव्य देकर अभिभूत किया और अगली काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ का संकल्प लिया। रोज़ी जी ने बहुत प्रेरक उद्गार व्यक्त किए और अपनी लेखनी को पुनर्जीवित करने की प्रेरणा ली, अगली गोष्ठी में निश्चित तौर पर काव्य सरिता बहेगी। श्रीमती एक्का जी जो स्वयं प्रधानाचार्या हैं उन्होंने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और लेखन-पठन की प्रेरणा को उद्घाटित किया। अर्चना नैनसी जी ने भी कार्यक्रम की सराहना में उद्गार व्यक्त किए।
कुमार रोहित रोज ने अपनी उम्दा ग़ज़ल से श्रोताओं व मंच को भावविभोर किया और संचालिका कुसुम लता ‘कुसुम’ जी ने भी अपने गीतों की सुंदर अभिव्यक्ति दी। अंत में मंचासीन अतिथियों ने आशीर्वचन व काव्यपाठ से सबको मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम अध्यक्षा डॉ. नेहा इलाहाबादी जी के मुक्तक व गज़ल ने काव्य गोष्ठी को श्रेष्ठता प्रदान करते हुए चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया। सारा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान रहा, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इस काव्य गोष्ठी की संध्या कभी न हो । अंत में शानदार जलपान की व्यवस्था ने कार्यक्रम को जैसे चार चांद लगा दिए। सभी कवि/कवयित्रियों को साहित्य संगम संस्थान दिल्ली इकाई ने अंगवस्त्र व अभिनंदन पत्र से सम्मानित किया। इस प्रकार अपनी तरह के इस अनूठे कार्यक्रम साक्षात्कार व काव्य गोष्ठी ने अपनी अलग पहचान कायम की व संगम को बुलंदियों पर पहुँचाने का पावन कार्य किया। अंत में कार्यक्रम संयोजक कुमार रोहित रोज ने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह केवल आगाज है बहुत जल्द हम नये कार्यक्रम में मिलेंगे।