मैं मजदूर हूं,
गर्व से कहता हूं,
मैं मजदूर हूं , मैं मजदूर हूं ।
मेरे चेहरे पर ना कोई शिकन,
मैं बोझ उठाता हूं,
जूझता, बुझता हूं,
फक्र से कहता हूं,
मैं मजदूर हूं ,मैं मजदूर हूं।
मैं भाग्य पर नहीं बैठता ,
नित कार्य करता हूं,
मैं अपने को कोसता नहीं,
मैं उनसे लड़ता हूं ,
मेरा अधिकार जो छीन लेते हैं,
मैं अपने पे नाज करता हूं,
क्योंकि, मैं मजदूर हूं ,
मैं मजदूर हूं, मैं मजदूर हूं।
–चेतना चितेरी, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश।