राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’–
मै उजाड़ वो दरख्त हूँ
जो किसी काम का नहीँ।
कितने ही पक्षियों का
मेरी गोद मे जीवन पला।
जिन्दगी शायद यही और
यह फलसफा है इसका।
सूखा दरख्त चाहकर भी
‘राघव’ होता नहीँ हरा।
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’–
मै उजाड़ वो दरख्त हूँ
जो किसी काम का नहीँ।
कितने ही पक्षियों का
मेरी गोद मे जीवन पला।
जिन्दगी शायद यही और
यह फलसफा है इसका।
सूखा दरख्त चाहकर भी
‘राघव’ होता नहीँ हरा।