जिन्दगी का फलसफा

July 3, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– मै उजाड़ वो दरख्त हूँजो किसी काम का नहीँ।कितने ही पक्षियों कामेरी गोद मे जीवन पला।जिन्दगी शायद यही औरयह फलसफा है इसका।सूखा दरख्त चाहकर भी‘राघव’ होता नहीँ हरा।