सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

मेरी ख़ुशियाँ, मेरे घर मे

1–मेरा घर छोटा–सा ही पर ,
मेरे घर में रहनेवालों का दिल बहुत ही बड़ा है ।

2–मैं महंगी वस्तुओं से नहीं,
मैं बेला ,गुलाब , गुड़हल ,चंपा , चमेली फूलों से ,
घर को सजा कर रखती हूंँ।

3- मैं घर से बाहर कहीं जाती हूंँ तो मुड़ – मुड़ के बार – बार घर को देखती हूंँ।

4 मेरे प्राण घर के कोने – कोने में बसते हैं,
मुझे अपने घर में सुकून मिलता है।

5- मेरा घर मंदिर है और मेरे माता – पिता भगवान,
रोज़ सुबह – शाम दीपक जलाती हूंँ ,
सब ख़ुश रहे यही दुआ मांँगती हूंँ।

6- मेरे घर की रौनक हमेशा बनी रहे,
बच्चों को अच्छे संस्कार देती हूंँ,
मैं जानती हूंँ , यही मेरे धन – दौलत हैं,
इन्हीं से मेरे घर की ख़ुशियांँ हैं।

–चेतनाप्रकाश चितेरी, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश।